गाजीपुर जिले के नोनहरा थाना क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय उर्फ जोखू की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि नौ सितंबर को थाना परिसर में चल रहे धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद ग्यारह सितंबर को उनकी मौत हो गई। घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
गठित की गई एसआईटी
प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल यानी एसआईटी के गठन का आदेश दिया है। इस तीन सदस्यीय जांच समिति की अध्यक्षता वाराणसी कमिश्नरेट के डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल करेंगे। समिति में दो अन्य अधिकारी, अंशुमान मिश्रा (अपर पुलिस उपायुक्त, वाराणसी) और नितिन तनेजा (सहायक पुलिस आयुक्त, कैंट वाराणसी) को भी शामिल किया गया है। यह टीम पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करेगी।
इससे पहले गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी सहित छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था, जबकि पांच अन्य को पुलिस लाइन स्थानांतरित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच को किसी भी प्रकार से प्रभावित न होने देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
एडीजी ने कहा ये
एडीजी जोन वाराणसी पीयूष मोर्डिया ने बताया कि घटना के बाद जिलाधिकारी द्वारा एसआईटी का गठन किया गया है, जो सभी पहलुओं की जांच कर निष्कर्ष के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस उपमहानिरीक्षक वाराणसी मृतक के परिजनों से मिल चुके हैं और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया गया है।
इधर भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय, जिला प्रभारी डॉ. राकेश त्रिवेदी और पूर्व जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच एसआईटी को सौंपने के निर्देश दिए और कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब इस पूरे घटनाक्रम की निगरानी जनता, प्रशासन और राजनीतिक दल तीनों स्तरों पर की जा रही है। सभी की निगाहें एसआईटी की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।