कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पुलिस लाइनों और सभी थानों में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। खास बात यह है कि यह परंपरा यहां 31 साल बाद दोबारा शुरू हो रही है। 1994 में जन्माष्टमी के दिन हुई एक मुठभेड़ में छह पुलिसकर्मियों की शहादत के बाद से यहां पुलिस विभाग इस त्योहार को अशुभ मानने लगा था और इसे मनाना बंद कर दिया गया था।
ये था मामला
घटना 29 अगस्त 1994 की है, जब जिले के पडरौना क्षेत्र में सक्रिय कुख्यात ‘जंगल पार्टी’ गिरोह की गतिविधियों की सूचना पुलिस को मिली थी। गिरोह के डकैत एक ग्राम प्रधान के घर डकैती और हत्या की योजना बना रहे थे। इस सूचना पर पुलिस की दो टीमों को बांसी नदी के पार अभियान पर भेजा गया।
पहली टीम लौट आई, लेकिन दूसरी टीम जब नाव से नदी पार कर रही थी, तभी डकैतों ने बम फेंकते हुए गोलियां बरसा दीं। गोलीबारी में नाविक और एक सिपाही की मौत हो गई, जिससे नाव पलट गई और पुलिसकर्मी पानी में गिर पड़े। हमलावरों की ताबड़तोड़ फायरिंग में छह पुलिसकर्मी शहीद हो गए।
1. उपनिरीक्षक अयोध्या प्रसाद
2. मुख्य आरक्षी ओमप्रकाश
3. आरक्षी महेंद्र सिंह
4. आरक्षी शंकर यादव
5. आरक्षी हरिशंकर यादव
6. आरक्षी रामसजीवन यादव

इस दर्दनाक घटना ने पूरे जिले को शोक में डुबो दिया। पुलिस बल के लिए जन्माष्टमी का दिन वर्षों तक एक गहरे घाव की तरह याद किया जाने लगा। तभी से थानों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन बंद कर दिया गया था।
एसपी ने लिया निर्णय
लेकिन इस साल, पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने इस परंपरा को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने सभी थानों और पुलिस लाइन में पारंपरिक तरीके से जन्माष्टमी मनाने के निर्देश जारी किए हैं। उनका मानना है कि अब समय आ गया है कि पुराने डर को पीछे छोड़, इस पर्व को एकजुटता और उत्साह के साथ मनाया जाए।