उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धनतेरस के अवसर पर यूपी पुलिस में चयनित 4,543 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान सीएम योगी का एक अलग अंदाज देखने को मिला। उन्होंने नियुक्ति पत्र पाने वाले अभ्यर्थियों से तीन सवाल पूछे, जो भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े थे। मुख्यमंत्री ने सीधे अभ्यर्थियों से पूछा कि क्या नौकरी पाने के लिए किसी को सिफारिश लगवानी पड़ी या किसी तरह का लेन-देन करना पड़ा?
सीएम योगी ने अभ्यर्थियों से पूछे ये तीन सवाल
नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभ्यर्थियों से पहला सवाल पूछा कि क्या किसी को नौकरी पाने के लिए किसी की सिफारिश की जरूरत पड़ी थी? इसके बाद उन्होंने दूसरा सवाल किया कि क्या किसी भी तरह का लेन-देन अभ्यर्थियों के स्तर पर हुआ या किसी ने उन्हें रिश्वत देने का ऑफर किया था?
मुख्यमंत्री का तीसरा सवाल था कि क्या किसी ने धौंस दिखाकर नियुक्ति पत्र हासिल करने की कोशिश की थी? इस पर सीएम योगी ने खुद कहा कि तीसरी बात तो वह खुद भी नहीं मानते।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि धनतेरस के शुभ अवसर पर उन्हें नियुक्ति पत्र मिलना खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नौजवानों को नौकरी देने का सिलसिला बिना रुके, बिना डिगे और बिना झुके लगातार जारी रहेगा।
सीएम योगी ने दावा किया कि साल 2017 के बाद प्रदेश के युवाओं को बिना सिफारिश, बिना पक्षपात और बिना रिश्वत के नौकरी मिल रही है। सरकार अब तक एक लाख से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित कर चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही 25 हजार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।
तीसरी बार सरकार बनने पर मिलेंगे कुछ नियुक्ति पत्र
सीएम योगी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि नियुक्तियों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। कुछ नियुक्ति पत्र रोककर रखे जाएंगे, जिन्हें तीसरी बार सरकार बनने पर दिया जाएगा। वहीं, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने भी चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें बिना सिफारिश और पक्षपात के अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी मिली है।