प्रयागराज: नैनी थाने से जुड़े एक मामले में नकदी की बरामदगी को लेकर पुलिस विभाग में कार्रवाई हुई है। दो युवकों की गिरफ्तारी के बाद सामने आए रकम के अंतर और पुलिस पर लगाए गए आरोपों के बीच तीन दरोगाओं को निलंबित कर दिया गया है। मामला अदालत तक पहुंचा, जहां रिमांड अर्जी खारिज करने के साथ शिकायतों की जांच कराने के निर्देश दिए गए थे।
गिरफ्तारी के बाद रकम को लेकर विवाद
मध्य प्रदेश के रीवा निवासी विपिन कुमार पाठक और आकाश सिंह को एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान 6.55 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई, लेकिन दर्ज मुकदमे में बरामद नकदी 87,500 रुपये बताई गई। इसी अंतर को लेकर सवाल उठे।
गिरफ्तार युवकों ने पुलिस पर फर्जी बरामदगी दर्ज करने और रुपये हड़पने के आरोप लगाए। इन शिकायतों के बाद मामले की जांच तेज हुई।
प्रारंभिक जांच में भूमिका सामने आने के बाद एसआई विक्की गुप्ता, एसआई रामानंद विश्वकर्मा और एसआई नीलेश कुमार को निलंबित किया गया। विक्की गुप्ता अरैल चौकी, रामानंद विश्वकर्मा कांशीराम चौकी और नीलेश कुमार जिला कारागार चौकी के प्रभारी थे। डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव ने निलंबन की पुष्टि करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
ऑडियो और सीसीटीवी फुटेज की भी होगी पड़ताल
विवाद के बीच तीन ऑडियो सामने आने की बात कही गई। इनमें कथित बातचीत के दौरान रकम वापस कराने, दरोगा से मिलने और मामले में समझौते का जिक्र होने का दावा है। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
15 अक्टूबर को विशेष एनडीपीएस अदालत ने पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज कर शिकायतों की जांच कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने कथित तौर पर बरामद असलहों की स्थिति और तलाशी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। पुलिस ने दोनों युवकों से स्मैक, नकदी, हथियार, कारतूस और मोबाइल फोन मिलने का दावा किया था।
अब विभागीय जांच के साथ अदालत के निर्देश पर भी मामले की पड़ताल होनी है। जांच में बरामदगी के रिकॉर्ड, नकदी के अंतर, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।