प्रयागराज में अतीक अहमद के बेटे उमर अहमद के पहुंचने के दौरान नजर आए बड़े काफिले को लेकर यूपी पुलिस की जांच आगे बढ़ गई है। उमर के साथ चल रही निजी गाड़ियों में से कुछ को लेकर टोल प्लाजा पर विवाद हुआ था। आरोप है कि कई वाहन बिना टोल शुल्क दिए आगे निकल गए। कर्मचारियों ने जब भुगतान के लिए रोका तो कथित तौर पर उनके साथ विवाद हुआ और एक वाहन से उन्हें कुचलने की कोशिश भी की गई। इन घटनाओं के बाद अलग-अलग थानों में मामले दर्ज हुए हैं।
अब पुलिस का फोकस उन निजी वाहनों पर है, जो उमर के काफिले का हिस्सा बने थे। जांच टीम वाहनों के नंबरों के आधार पर उनके मालिकों तक पहुंच रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना के वक्त वाहन कौन चला रहा था और उसमें कौन लोग सवार थे।
काफिले में वाहन कब और कहां जुड़े?
जांच का एक अहम सवाल यह है कि उमर के साथ चल रहा पूरा काफिला लखनऊ से ही तैयार होकर निकला था या रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर लोग इसमें शामिल होते गए। पुलिस इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए टोल प्लाजा के CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देख रही है। फुटेज में मिले वाहनों के नंबरों को परिवहन विभाग के रिकॉर्ड से मिलाकर उनकी आवाजाही का क्रम तैयार किया जा रहा है।
पुलिस कुछ वाहन मालिकों की पहचान कर उनसे पूछताछ भी कर रही है। उनसे यह जानने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें उमर के प्रयागराज जाने की जानकारी कैसे मिली और काफिले में शामिल होने का फैसला किसके कहने पर लिया गया।
कई जिलों के वाहनों का जिक्र
प्रयागराज के नवाबगंज थाने में दर्ज एफआईआर में अलग-अलग जिलों में पंजीकृत वाहनों का उल्लेख है। इनमें प्रयागराज के 10 और लखनऊ के 9 वाहन बताए गए हैं। इसके अलावा आजमगढ़, बरेली, गोरखपुर, झांसी और दिल्ली के भी वाहन शामिल हैं। कई अन्य गाड़ियों की पहचान अभी बाकी है।
पुलिस अब टोल प्लाजा की घटनाओं और काफिले की पूरी आवाजाही को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि निजी वाहनों का यह जमावड़ा पहले से तय था या उमर के प्रयागराज आने की खबर के बाद लोग रास्ते में काफिले के साथ जुड़ते गए।