इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस में कथित भ्रष्टाचार और पुलिसकर्मियों के व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल होने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदेश के थाने अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि धीरे-धीरे व्यावसायिक गतिविधियों के अड्डे बनते जा रहे हैं। कोर्ट ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य के पुलिस महकमे को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इस याचिका पर हुई सुनवाई
यह टिप्पणी जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने बलिया के रसड़ा थाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार परिवहन व्यवसाय से जुड़े हुए थे और उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण भी प्राप्त था। अदालत ने इसे गंभीर भ्रष्टाचार का मामला मानते हुए कहा कि यदि पुलिसकर्मी स्वयं व्यवसाय करेंगे तो निष्पक्ष कानून व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब अगली सुनवाई कब होगी
हाईकोर्ट ने मामले में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अपर मुख्य सचिव (गृह) को विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है। साथ ही रसड़ा थाने में तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा है। अदालत ने डीजीपी को 10 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई का शपथपत्र (हलफनामा) दाखिल करने का भी आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
यह मामला हरेंद्र यादव की याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके ट्रक को सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने मनमाने तरीके से ब्लैकलिस्ट कर दिया। याचिका में यह भी दावा किया गया कि कांस्टेबल संतोष कुमार ने अपने जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) से धन निकालकर हरेंद्र यादव के नाम पर ट्रक खरीदा था। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।