लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान महिला सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में रहने वाला प्रदेश अब कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के कारण नई पहचान बना रहा है।
चलाये कई अभियान
योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता संभालने के बाद महिला सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉड को सक्रिय किया गया। वहीं, महिला हेल्पलाइन सेवाओं को मजबूत करने के साथ पुलिस थानों में महिला डेस्क स्थापित की गईं, ताकि पीड़ित महिलाओं को तत्काल सहायता मिल सके।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से पुलिस भर्ती में आरक्षण की व्यवस्था की गई, जिससे पुलिस बल में महिला कर्मियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। आज बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी बीट पुलिसिंग और पिंक पेट्रोलिंग के जरिए सड़कों, बाजारों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के खिलाफ कई गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है। अपहरण, दहेज उत्पीड़न और दुष्कर्म जैसे मामलों में गिरावट को सरकार अपनी सख्त कानून-व्यवस्था का परिणाम मान रही है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और पुलिस की बढ़ी जवाबदेही का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।
महिला सुरक्षा में निभाई अहम भूमिका
महिला सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और आत्मनिर्भरता पर जोर देकर महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यही वजह है कि महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का मॉडल आज राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।