कानपुर में आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां के इलाज में कथित लापरवाही और हाथ काटे जाने के मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। कार्रवाई की मांग को लेकर विकास सिंह लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। 20 मई को वह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए थे, जिसके बाद पूरा मामला सुर्खियों में आ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने स्वास्थ्य विभाग से जांच कराई, लेकिन जो रिपोर्ट सामने आई उसे पीड़ित परिवार और आईटीबीपी अधिकारियों ने पूरी तरह असंतोषजनक बताया। रिपोर्ट में केवल संभावनाओं का उल्लेख किए जाने पर सवाल उठने लगे और मामले में स्पष्ट निष्कर्ष न होने से नाराजगी और बढ़ गई।
तब गंभीर हो गई स्थिति
शनिवार सुबह स्थिति और भी गंभीर हो गई जब आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद, लाइजनिंग अफसर अर्पित और 50 से अधिक जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। जवानों की मौजूदगी से पूरा परिसर छावनी में तब्दील हो गया। इस दौरान अधिकारियों ने पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था डॉ. विपिन ताडा से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की।
करीब एक घंटे तक चली बैठक में आईटीबीपी अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि रिपोर्ट में सिर्फ संभावनाओं का जिक्र है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संक्रमण आखिर फैला कैसे और मरीज की हालत इतनी गंभीर क्यों हुई। अधिकारियों ने जांच टीम पर अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों को बचाने का आरोप भी लगाया।
सतर्कता बढ़ाई गई
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले में सही जांच नहीं हो रही और जिम्मेदारी तय करने की बजाय रिपोर्ट को गोलमोल तरीके से तैयार किया गया है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस कमिश्नर कार्यालय में सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है।