फतेहपुर जिले में गैंगरेप की घटना के बाद हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। पीड़िता से मिलने पहुंचे राजनीतिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव ने मामला गरमा दिया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा महिला पुलिसकर्मियों के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर हो रही है। ड्यूटी पर तैनात महिला सिपाहियों के साथ हुई बदसलूकी ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस सम्मान पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ये था मामला
फतेहपुर के खागा कोतवाली क्षेत्र में गैंगरेप पीड़िता से मिलने जा रहे अपनी जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा रोके जाने के दौरान माहौल अचानक बिगड़ गया। पुलिस के अनुसार, जब महिला सिपाहियों ने कार्यकर्ताओं को गांव में प्रवेश से रोकने की कोशिश की, तो कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया।
ड्यूटी पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने साफ तौर पर कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं और उनके साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। घटना के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मौके पर मौजूद अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
वहीं, कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें पीड़िता से मिलने से रोकना उनके अधिकारों का हनन है, लेकिन पुलिस का कहना है कि यह कदम पीड़िता की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया।
कार्रवाई में हुई तेजी
इस बीच पुलिस ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। एक और आरोपी जुगेश सिंह को नामजद करते हुए कुल अभियुक्तों की संख्या चार कर दी गई है। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी बबलू सिंगरौर अब भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
पुलिस ने सात टीमें गठित कर विभिन्न स्थानों पर दबिश शुरू कर दी है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट और संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी हाल में कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।