बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। उससे पहले सुरक्षाबलों ने विभिन्न क्षेत्रों में जाकर सुरक्षा का जायज़ा लिया और अव्यवस्था फैलाने वाले लोगों को कड़ी चेतावनी दी। इसी क्रम में यूपी के ‘एंकाउंटर स्पेशलिस्ट’ कहे जाने वाले IPS अजय पाल शर्मा ने पर्यवेक्षक के तौर पर फाल्टा विधानसभा का दौरा किया और वहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायज़ा लिया। साथ ही TMC के उम्मीदवार जहांगीर खान को चेतावनी देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अजय पाल शर्मा ने सख्त लहजे में कहा कि जहांगीर को बता दें—अगर लोगों को धमकाया गया, तो फिर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य में 23 अप्रैल को पहले चरण का चुनाव हुआ था। कुल 152 विधानसभा क्षेत्रों में छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें, तो मतदान काफी हद तक सुचारू और शांतिपूर्ण रहा। अब बारी दूसरे चरण की है। 29 अप्रैल को कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल की 142 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस चरण को लेकर चुनाव आयोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोग ने 11 नए पुलिस पर्यवेक्षकों की एक सूची जारी की है। लेकिन इस सूची ने बंगाल के सियासी गलियारों में सबको चौंका दिया है, क्योंकि 11 नामों की इस फेहरिस्त में सबसे पहला नाम यूपी कैडर के तेजतर्रार आईपीएस अफसर अजय पाल शर्मा का है।
कौन हैं अजय पाल शर्मा, जिन्हें कहा जाता है ‘सिंघम’?
अजय पाल शर्मा यूपी पुलिस का वह चेहरा हैं, जो अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने के लिए जाने जाते हैं। यूपी में तैनाती के दौरान उन्होंने दर्जनों अपराधियों का एनकाउंटर किया है और कई खूंखार बदमाशों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। अपनी फिट बॉडी, आंखों पर काला चश्मा और ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली पुलिसिंग के कारण उन्हें यूपी का ‘सिंघम’ कहा जाता है। उनका नाम ही स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था को सख्त करने का एक बड़ा मनोवैज्ञानिक हथियार माना जाता है।
अभिषेक बनर्जी के जिले में ही तैनाती क्यों?
चुनाव आयोग ने अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना का पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। यह कोई आम जिला नहीं है। यह TMC का सबसे मजबूत गढ़ है और राजनीतिक रूप से इसे अभिषेक बनर्जी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। बंगाल चुनावों के इतिहास में इस इलाके में अक्सर हिंसक झड़पें, बूथ कैप्चरिंग की कोशिशें और राजनीतिक बवाल देखने को मिलते रहे हैं। ऐसे में यहां एक ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की तैनाती का सीधा संदेश यह है कि चुनाव आयोग इस बार किसी भी तरह की धांधली या हिंसा से सख्ती से निपटेगा। पुलिस पर्यवेक्षक के तौर पर शर्मा के पास स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती और उन पर नियंत्रण का सीधा अधिकार होगा।