वाराणसी में पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। शहर के तीन प्रमुख थानों में लंबित मामलों और लापरवाही को लेकर पुलिस आयुक्त ने कड़ी कार्रवाई की है। जांच में सामने आया कि कई मामलों की विवेचना लंबे समय से अधूरी पड़ी थी, जिससे कानून व्यवस्था पर असर पड़ रहा था। इस पर संज्ञान लेते हुए पुलिस आयुक्त ने न सिर्फ जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित किया, बल्कि विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। इस कार्रवाई को पुलिस महकमे में बड़ी सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
ये है मामला
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कैंट, शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर थानों की कार्यप्रणाली की समीक्षा के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए एक निरीक्षक समेत 12 उपनिरीक्षकों को निलंबित कर दिया। जांच के दौरान पाया गया कि इन पुलिसकर्मियों ने करीब 60 दिनों तक कई मामलों की विवेचना लंबित रखी थी और उनके कामकाज का प्रदर्शन भी संतोषजनक नहीं था।
निलंबित पुलिसकर्मियों में कैंट थाने के निरीक्षक संतोष पासवान सहित कई उपनिरीक्षक शामिल हैं, जबकि शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर थानों के पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है। पुलिस आयुक्त ने सभी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।
समीक्षा बैठक में लंबित विवेचनाओं, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने, गैर-जमानती वारंट की तामील और वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी जैसे मामलों की भी पड़ताल की गई। इसमें यह सामने आया कि कई मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं की गई, यहां तक कि वारंट जारी होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई।
थाना प्रभारियों पर है जिम्मेदारी
इसके अलावा बिना नंबर वाहनों और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं पाई गई। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ट्रैफिक व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल ट्रैफिक पुलिस की नहीं, बल्कि संबंधित थाना प्रभारियों की भी है।
उन्होंने शहर में जाम की समस्या कम करने, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान तेज करने तथा प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के निर्देश भी दिए हैं।