कौशांबी के पिपरी थाना क्षेत्र के चिल्ला शाहबाजी गांव में अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के दौरान हुए भीषण विस्फोट के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। घटना में 11 लोगों की मौत और पांच लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद आईजी प्रयागराज परिक्षेत्र ने पिपरी थाने और चौकी चायल से जुड़े सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक सितंबर 2026 को की गई।
31 अगस्त को हुआ था हादसा
31 अगस्त 2026 की सुबह करीब 11:30 बजे चिल्ला शाहबाजी स्थित एक अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण कारखाने में विस्फोट हुआ था। हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए। मामले में पिपरी थाने में छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और विस्फोटक अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
जांच में सामने आया कि कारखाना संचालित करने वाले नौशाद अली पुत्र निजामुद्दीन, निवासी महमूदपुर मनौरी, थाना पिपरी के नाम पांच वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस जारी किया गया था, जिसकी अवधि 31 मार्च 2026 तक थी। हालांकि, अनियमितता पाए जाने पर चार अप्रैल 2024 को ही लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। इसके बावजूद आरोपी द्वारा अवैध रूप से पटाखा निर्माण और भंडारण जारी रखने की बात सामने आई।
दी गई ये जानकारी
अक्टूबर 2024 में आरोपी के खिलाफ अवैध पटाखा फैक्ट्री संचालन को लेकर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने दोबारा अवैध गतिविधियां शुरू कर दीं। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई न करने के आरोप में तत्कालीन थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी समेत सात पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है।
निलंबित पुलिसकर्मियों में निरीक्षक शिवचरण राम, उपनिरीक्षक विकास सिंह, उपनिरीक्षक विनय सिंह, उपनिरीक्षक अजीत कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अभिषेक गुप्ता, उपनिरीक्षक मनीष पाल और उपनिरीक्षक अमित द्विवेदी शामिल हैं।