पूर्व आईपीएस और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर को लखनऊ पुलिस की विशेष टीम ने गिरफ्तार किया है। ठाकुर कल रात लखनऊ से दिल्ली की यात्रा पर थे, लेकिन शाहजहांपुर स्टेशन पर उन्हें ट्रेन से उतारकर देवरिया ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारी उस मामले से जुड़ी है जिसमें ठाकुर पर पहले ही एफआईआर दर्ज थी और उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया।
हाल ही में इस मामले में उठाए थे सवाल
अमिताभ ठाकुर भ्रष्टाचार और सरकारी गड़बड़ियों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कानपुर के अधिवक्ता अखिलेश दुबे से जुड़ी संपत्तियों की गहन जांच की मांग की थी। ठाकुर ने मंडलायुक्त और पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि साकेतनगर में सरकारी पार्क की जमीन पर अवैध कब्जा कर किशोरी वाटिका गेस्ट हाउस बनाया गया और दुबे के कार्यालय के लिए गलत आवंटन किया गया। इसके अलावा, उन्होंने स्कूल संचालन में भी कथित अवैधताओं की जांच की मांग की।
पत्र में एक सरकारी कर्मचारी पर भी आरोप लगाया गया कि उसने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से दुबे की मदद की। ठाकुर ने जोर देकर कहा कि जांच में दोषियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और अवैध कब्जा या लाभ से अर्जित संपत्ति की रिकवरी अनिवार्य होनी चाहिए।
लोगों का कहना है ये
इस गिरफ्तारी के बाद प्रशासन और नागरिकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। समर्थक इसे राजनीतिक दबाव के तहत कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि पुलिस इसे केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा मान रही है। मामला उत्तर प्रदेश में सरकारी संपत्ति और भ्रष्टाचार की जांच के महत्व को भी उजागर करता है। अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी ने फिर से सवाल उठाया है कि क्या भ्रष्टाचार और भूमि विवाद के मामलों में सभी के लिए कानून समान रूप से लागू होता है।