बदायूं में न्यायालय सुरक्षा में तैनात दारोगा ने की आत्महत्या, परिजनों ने लगाए उत्पीड़न के आरोप

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बदायूं जिले में न्यायालय सुरक्षा में तैनात दारोगा मेघ श्याम गौतम का शव किराए के मकान में फंदे से लटका मिलने से हड़कंप मच गया। गुरुवार सुबह पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला। प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगना सामने आया है। वहीं, मृतक के परिजनों ने न्यायालय सुरक्षा प्रभारी शाहिद अली पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।

बुधवार को ही वापस लौटे थे

मथुरा जिले के गोविंदनगर थाना क्षेत्र के सकना गांव निवासी मेघ श्याम गौतम अगस्त 2024 में बदायूं में तैनात हुए थे। वर्तमान में उनकी ड्यूटी न्यायालय सुरक्षा में थी और वह शहर की मधुवन कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहे थे। बताया गया कि वह 25 मई को अवकाश पर घर गए थे और बुधवार को वापस बदायूं लौटे थे।

गुरुवार सुबह उनकी बेटी राधिका ने फोन किया, लेकिन काफी देर तक कॉल रिसीव नहीं हुई। इसके बाद मकान मालिक के परिवार को सूचना दी गई। जब कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो यूपी-112 पुलिस को बुलाया गया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ा तो अंदर दारोगा का शव दरवाजे के ऊपर लगी खिड़की के एंगल से लटका मिला।

सूचना मिलते ही एसएसपी अंकिता शर्मा, एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह और सीओ सिटी समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग से मौत की वजह बताया गया है।

लगाए गए ये आरोप

पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे दारोगा मेघ श्याम गौतम के परिजनों ने न्यायालय सुरक्षा प्रभारी शाहिद अली पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि मेघ श्याम पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थे और उन्हें ड्यूटी के दौरान लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार के अनुसार, मेघ श्याम तिलक लगाकर ड्यूटी पर जाते थे, जिसको लेकर शाहिद अली अक्सर उनसे बहस करते थे और आपत्ति जताते थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर होने वाले इस कथित उत्पीड़न के कारण वह काफी परेशान रहने लगे थे। उनका कहना है कि लगातार मानसिक दबाव और तनाव ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

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