नोएडा के सेक्टर-150 में मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में पानी भरने से हुई सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले ने राज्य सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। बढ़ते जनआक्रोश के बीच सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को पद से हटा दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष, गहन और समयबद्ध जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है।
एसआईटी ने औपचारिक रूप से जांच शुरू कर दी है। टीम सबसे पहले नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंची, जहां करीब दो घंटे तक संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों से जानकारी ली गई। इसके बाद जांच दल घटनास्थल के लिए रवाना हुआ। शासन ने एसआईटी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे, ताकि उसके आधार पर जिम्मेदारों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सके।
एडीजी मेरठ जोन कर रहे हैं नेतृत्व
इस विशेष जांच दल का नेतृत्व मेरठ जोन के एडीजी करेंगे। उनके साथ मेरठ मंडल के आयुक्त और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता को भी शामिल किया गया है। टीम को हादसे के पीछे के वास्तविक कारणों, प्रशासनिक लापरवाही, संबंधित विभागों की भूमिका और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए जरूरी सुधारात्मक कदमों की विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
एसआईटी क्षेत्र की जलनिकासी व्यवस्था, सड़क और अंडरपास निर्माण की गुणवत्ता, मौके पर चेतावनी संकेतों की उपलब्धता और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की भी पड़ताल करेगी। यह भी देखा जाएगा कि भारी बारिश और जलभराव के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण और निर्माण से जुड़ी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। बताया गया कि भारी जलभराव के दौरान युवराज की कार पानी से भरे गड्ढे या अंडरपास में फंस गई थी, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाए और उनकी जान चली गई।
मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एमजेड विजटाउन के मालिक और बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस स्तर पर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
एसआईटी की प्राथमिकता
एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर के अनुसार, एसआईटी सभी पक्षों से बातचीत कर रही है और हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों और कारणों का विश्लेषण कर पूरी रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी, ताकि जवाबदेही तय हो सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।