धनतेरस के मौके पर जहां बाजारों में चहल-पहल थी और लोग जमकर खरीदारी कर रहे थे, वहीं हापुड़ के एक बाजार में मिट्टी के दीये बेचने वाली एक महिला निराश बैठी थी। दिनभर में उसके एक भी दीये नहीं बिके थे। आने-जाने वालों की नजर उस पर नहीं पड़ी। लेकिन शाम होते-होते एक ऐसा वाकया हुआ जिसने न सिर्फ महिला का दिन बना दिया, बल्कि इंसानियत की मिसाल भी पेश कर दी।
गश्त के दौरान थानेदार ने खरीदे सारे दीये
जानकारी के मुताबिक, हापुड़ कोतवाली में तैनात थानेदार विजय गुप्ता बाजार में गश्त पर निकले थे। महिला को मायूस देख उन्होंने तुरंत निर्णय लिया और उसके सारे दीये खरीद लिए।
उन्होंने पूरा भुगतान करते हुए बिना कोई सवाल पूछे, महिला की मेहनत की कद्र की। दीये बेच रही महिला की आंखों में आंसू थे, लेकिन वह आंसू खुशी और सम्मान के थे।
लोग कर रहे सराहना
थानेदार विजय गुप्ता ने कहा, “हर घर में रौशनी हो, ये जरूरी है, लेकिन किसी का चेहरा रौशन करना उससे भी ज्यादा जरूरी होता है।” स्थानीय लोगों ने थानेदार के इस कदम की सराहना की और कहा कि यही है त्योहारों का असली मतलब — दूसरों की खुशी बनना।