प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के डीजीपी को गौतमबुद्धनगर व एटा की पुलिस द्वारा याची को परेशान करने के आरोपों की जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने डीजीपी को इस मामले में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। साथ ही, अगली सुनवाई के लिए 30 अप्रैल की तारीख तय की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने गौतमबुद्धनगर निवासी संध्या की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
ये है मामला
याची का आरोप है कि पुलिस बिना किसी ठोस कारण के उसे लगातार प्रताड़ित कर रही है। उसने दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। कोर्ट ने याचिका और पूरक हलफनामे की प्रति सीजेएम लखनऊ के माध्यम से डीजीपी को भेजने का निर्देश देते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं।
इसी के साथ, हाईकोर्ट ने एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने कहा कि यदि किसी नाबालिग लड़की को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश पर बालिका गृह में रखा गया है, तो उसे अवैध हिरासत नहीं माना जाएगा। अदालत ने यह टिप्पणी उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी कथित पत्नी को मथुरा के राजकीय बालिका गृह से मुक्त कराने की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा ये
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को न्यायिक शक्तियां प्राप्त हैं और उसके आदेश वैध होते हैं। ऐसे मामलों में हैबियस कॉर्पस याचिका सुनवाई योग्य नहीं होती। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी को आपत्ति है, तो अपील या पुनरीक्षण ही उचित कानूनी विकल्प है। दोनों मामलों में कोर्ट ने निष्पक्ष जांच और नाबालिग के हितों को सर्वोपरि बताया।