उत्तर प्रदेश की सड़कें अब पहले से ज्यादा सुरक्षित और अनुशासित बनाने की तैयारी है। डीजीपी मुख्यालय ने आदेश जारी करते हुए 5000 पुलिसकर्मियों को ट्रैफिक ड्यूटी पर लगाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि इनमें 557 महिला पुलिसकर्मी भी शामिल होंगी। सभी जवानों को एक महीने की विशेष ट्रेनिंग देकर ट्रैफिक निदेशालय की कमान में तैनात किया जाएगा।
सड़क हादसे बन रहे चुनौती
सूत्रों के मुताबिक, इस नई तैनाती में 60 इंस्पेक्टर, 180 सब-इंस्पेक्टर, 1264 हेड कांस्टेबल (पुरुष), 168 हेड कांस्टेबल (महिला) और करीब 3300 से ज्यादा कांस्टेबल शामिल हैं। राजधानी लखनऊ को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है— 650 पुलिसकर्मी। वजह साफ है, राजधानी में ट्रैफिक का दबाव सबसे अधिक है और सड़क हादसों की घटनाएं भी लगातार चुनौती बनी रहती हैं।
अन्य जिलों में बल का बंटवारा इस तरह किया गया है— गोरखपुर जोन को 500, मेरठ को 475, आगरा को 450, बरेली को 425, वाराणसी को 375, कानपुर को 300 और प्रयागराज को 250 जवान मिलेंगे। इसके अलावा सातों पुलिस कमिश्नरेट—लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद, प्रयागराज और गोरखपुर—को 225-225 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।
ट्रैफिक में उतरने से पहले सभी नए पुलिसकर्मी एक महीने की ट्रेनिंग लेंगे। इसमें सड़क सुरक्षा, जाम प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस ट्रेनिंग से जवान न सिर्फ नियम लागू करने में, बल्कि जनता से संवाद करने में भी दक्ष होंगे।
हादसों पर लगेगी लगाम
पिछले कुछ सालों में सड़क हादसों ने यूपी सरकार को चिंता में डाला है। अक्सर पुलिस बल की कमी के चलते यातायात व्यवस्था बिगड़ती रही है। अब इस नए फैसले से उम्मीद है कि सड़क पर अनुशासन बढ़ेगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती से शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक नियम पालन और जनसंपर्क और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।