उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की गलियों में पली-बढ़ी एक लड़की ने ऐसा इतिहास रचा, जिसे महाराष्ट्र पुलिस हमेशा याद रखेगी। IPS रश्मि शुक्ला न सिर्फ भारतीय पुलिस सेवा का जाना-पहचाना नाम हैं, बल्कि वे महाराष्ट्र पुलिस की पहली महिला महानिदेशक (DGP) बनकर महिला नेतृत्व की नई पहचान भी बनीं। यूपी की इस बेटी का सफर बताता है कि मेहनत, हौसला और नेतृत्व क्षमता किसी एक राज्य या सीमा में बंधी नहीं होती।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की पढ़ाई
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई के दौरान रश्मि शुक्ला ने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा था। यह सपना 1988 में पूरा हुआ, जब वे IPS अधिकारी के रूप में चयनित हुईं। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में रहते हुए कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी प्रशासनिक दक्षता और सख्त कार्यशैली ने उन्हें पुलिस विभाग के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में शामिल कर दिया।
जनवरी 2024 में रश्मि शुक्ला ने महाराष्ट्र की पहली महिला DGP के रूप में कार्यभार संभाला। यह नियुक्ति सिर्फ एक पद नहीं थी, बल्कि पुलिस बल में महिला नेतृत्व की ताकत का प्रतीक थी। उनके कार्यकाल के दौरान अनुशासन, प्रोफेशनलिज्म और जवाबदेही पर खास जोर देखा गया। रिटायरमेंट के मौके पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जो उनके लंबे और प्रभावशाली करियर का सम्मान था।
पीएम मोदी कर चुके हैं सराहना
हालांकि, उनका सफर पूरी तरह आसान नहीं रहा। महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान फोन टैपिंग जैसे गंभीर आरोपों को लेकर वे राजनीतिक विवादों में भी रहीं। जांच और एफआईआर के दौर से गुजरने के बावजूद उन्हें न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर राहत मिली। इन चुनौतियों के बाद उनकी वापसी और भी मजबूत रही, जिसने उनके नेतृत्व को नई धार दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी कार्यशैली और समर्पण की सराहना कर चुके हैं। आज रश्मि शुक्ला को न सिर्फ उनकी उपलब्धियों के लिए, बल्कि संघर्षों के बावजूद डटे रहने के जज़्बे के लिए भी याद किया जाता है। प्रयागराज की बेटी से महाराष्ट्र की डीजीपी बनने तक का यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत प्रेरणा है।