गाजियाबाद। पुलिस महकमे की साख पर बड़ा दाग लगाते हुए लोनी थाने में तैनात सिपाही मनीष कुमार चौहान कार चोरी के गैंग का सरगना निकला। यह वही मनीष है जिसे साल 2006 में पुलिस सेवा में भर्ती किया गया था, लेकिन दो दशक बाद वह खुद अपराधियों का साथी बन गया।
जांच में सामने आई बात
पुलिस जांच में सामने आया है कि मनीष लग्जरी गाड़ियों की डिमांड सीधे व्हाट्सऐप पर लेता था और फिर अपने गैंग को चोरी का ऑर्डर देता था। गैंग के सदस्य दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी से महंगी गाड़ियां चुराकर मनीष के बताए ठिकानों पर खड़ी कर देते थे।
उसके बाद नेटवर्क के जरिए ये गाड़ियां हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों तक पहुंचाई जाती थीं। अब तक 50 से ज्यादा वाहन इस गिरोह द्वारा चोरी किए जाने की पुष्टि हुई है।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि हाल ही में मुरादनगर की एक फैक्ट्री में चोरी की ब्रेजा कार बरामद हुई थी। इस सुराग से पूरे गैंग की परतें खुलीं। हैरानी की बात यह रही कि जब पुलिस रेड करने पहुंची तो मौके पर खुद मनीष मौजूद था। उसने साथी पुलिसवालों को बहलाने के लिए चाय पिलाने का बहाना बनाया और इसी दौरान कार हटवा दी। हालांकि, गाड़ी में लगे जीपीएस ट्रैकर ने उसकी चालाकी का भंडाफोड़ कर दिया।
मनीष पहले भी विवादों में रह चुका है। हापुड़ में तैनाती के दौरान कस्टडी में मौत का मामला उस पर दर्ज हुआ था और तब उसे जेल भेजा गया था। गढ़ थाने में रहते हुए भी वह सस्पेंड हो चुका है। अब गाजियाबाद में सलमानी गैंग की गिरफ्तारी के बाद उसका काला सच सामने आ गया।
अफसरों ने कहा ये
एडिशनल पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी के मुताबिक मनीष को सस्पेंड कर दिया गया है और उसके पूरे करियर की जांच कराई जा रही है। विभागीय रिपोर्ट मिलने के बाद उस पर आपराधिक केस दर्ज करने की तैयारी है।