मेरठ में पुलिस और भारतीय किसान यूनियन बीआर अंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय भाटी के बीच विवाद ने तूल पकड़ लिया है। किसान नेता ने मेरठ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और एसओजी टीम पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वह एक मामले में अपनी बात रखने एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन वहां से उन्हें हिरासत में ले लिया गया। भाटी का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने पहले एसएसपी कार्यालय और फिर एसओजी कार्यालय में उनके साथ मारपीट की और थर्ड डिग्री दी। इस दौरान उनके साथी मोहित जाटव के साथ भी मारपीट किए जाने का दावा किया गया है।
लगाए गंभीर आरोप
दिग्विजय भाटी के मुताबिक, वह बुधवार रात मोहित जाटव के साथ गैंगस्टर के एक मुकदमे की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। उनका कहना है कि वह मामले में अपनी सफाई रखने के लिए अधिकारियों से मिलने गए थे। भाटी ने आरोप लगाया कि एसएसपी अविनाश पांडेय के वहां पहुंचने के बाद माहौल बिगड़ गया और उनके साथ मारपीट की गई।
किसान नेता का दावा है कि इसके बाद उन्हें और मोहित जाटव को सिविल लाइंस पुलिस के जरिए पुलिस लाइन स्थित एसओजी कार्यालय ले जाया गया। वहां एसओजी टीम पर भी मारपीट और थर्ड डिग्री देने का आरोप लगाया गया है। भाटी के अनुसार, पिटाई के दौरान उनकी आंख से खून निकल आया। हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों को बुलाया गया और मेडिकल भी कराया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद सपा विधायक अतुल प्रधान देर रात परिजनों के साथ थाने पहुंचे। इसके बाद दिग्विजय भाटी को उनके साथ भेज दिया गया।
एसएसपी ने किया खंडन
वहीं, एसएसपी अविनाश पांडेय ने किसान नेता के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि दिग्विजय भाटी एक हिस्ट्रीशीटर के साथ पुलिस कार्यालय पहुंचे थे और वहां पुलिसकर्मियों से विवाद कर रहे थे। इसी कारण उन्हें हिरासत में लिया गया था। एसएसपी ने मारपीट और थर्ड डिग्री के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि बाद में उन्हें सुरक्षित घर भेज दिया गया।
इस विवाद के बीच गुरुवार देर रात शासन ने अविनाश पांडेय को मेरठ एसएसपी के पद से हटा दिया। उन्हें डीजीपी मुख्यालय लखनऊ में एसपी के पद पर संबद्ध किया गया है। अब पूरे मामले में किसान नेता के आरोपों और पुलिस के दावे के बीच आगे होने वाली जांच और कार्रवाई अहम मानी जा रही है।