बागपत। जिले के बड़ौत कस्बे में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रत्नम श्रीवास्तव के आदेश पर गुरुवार को तत्कालीन थाना प्रभारी अजय शर्मा समेत आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि इन्होंने चार साल पहले एक युवक को अवैध रूप से हिरासत में लेकर झूठा मामला दर्ज किया था।
ये है मामला
मामला जनवरी 2021 का है। गांव की रहने वाली सरोज ने अदालत में याचिका दाखिल कर बताया कि पुलिस ने उनके बेटे मोहित को जबरन पकड़कर थाने में रखा और पांच ट्रैक्टर-ट्रॉली बरामद दिखाकर चोरी का फर्जी मुकदमा बना दिया। महिला का आरोप है कि गांव की एक महिला से पुराने विवाद के चलते पुलिस ने उनके परिवार को निशाना बनाया।
शिकायत के मुताबिक 12 जनवरी को पुलिस घर पहुंची थी। दो दिन बाद खेत से लौटते समय मोहित के भाई अमित को पकड़ लिया गया और थाने में बदसलूकी की गई। सरोज का कहना है कि उन्हें धमकाया गया कि अगर थाने से नहीं गईं तो बेटे का एनकाउंटर कर दिया जाएगा। महिला का दावा है कि 19 जनवरी तक बेटे को हिरासत में रखकर बाद में जेल भेज दिया गया, जबकि सीसीटीवी फुटेज से बरामदगी की पुलिस कहानी झूठी साबित हुई।
केस दर्ज करने का आदेश जारी
सभी पक्षों को सुनने के बाद सीजेएम ने पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज करने का आदेश दिया। आदेश पर अमल करते हुए गुरुवार को मुकदमा कायम किया गया। यह कार्रवाई पुलिस की निष्पक्षता और जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।