प्रयागराज में पूर्व आईजी डीके पंडा से जुड़ा साइबर ठगी का मामला फिर से सुर्खियों में है। 1971 बैच के आईपीएस अफसर रह चुके डीके पंडा से ठगों ने करीब 4.32 लाख रुपये हड़प लिए। उन्होंने धूमनगंज थाने में तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
पहले भी सामने आया था मामला
डीके पंडा का नाम नया नहीं है। वह मूल रूप से उड़ीसा के रहने वाले हैं और 2005 में आईजी पद से इस्तीफा दे चुके हैं। तब उनकी तैनाती लखनऊ में आईजी रूल्स एंड मैनुअल के रूप में थी। खास बात यह है कि यह पहली बार नहीं जब वे साइबर अपराधियों के निशाने पर आए हों। पिछले साल अक्टूबर में भी उन्होंने ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था।
सक्रिय हैं साइबर अपराधी
सवाल यह है कि जब एक पूर्व आईजी, जिनका पुलिस और कानून व्यवस्था से सीधा जुड़ाव रहा है, बार-बार साइबर अपराध का शिकार हो सकते हैं, तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं? डीके पंडा का यह मामला साफ करता है कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क कितना सक्रिय और संगठित हो चुका है।
पुलिस की ओर से भले ही जांच शुरू कर दी गई हो, लेकिन यह घटना बताती है कि साइबर अपराध अब समाज के हर तबके के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। ऐसे अपराध न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि लोगों के भरोसे और सुरक्षा की भावना को भी गहरा आघात देते हैं।