जन्माष्टमी विशेष: कृष्ण भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए इन अफसरों ने त्याग दी अपनी वर्दी……

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जन्माष्टमी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि वो अहसास है जिसमें प्रेम, भक्ति और त्याग समाहित होता है। देशभर में जब श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम होती है, तो सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि लाखों दिलों में भी राधा-कृष्ण की भक्ति गूंजती है। कुछ लोगों के लिए यह प्रेम और भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं रह जाती — वो इसे जीवन का रास्ता बना लेते हैं। आज हम आपको ऐसे कुछ असाधारण भक्तों की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने सांसारिक मोह को त्यागकर, श्रीकृष्ण की सेवा को ही अपना जीवन बना लिया।

आईपीएस भारती अरोड़ा: वर्दी से सीधी भक्ति की राह

हरियाणा कैडर की 1998 बैच की सीनियर आईपीएस अधिकारी भारती अरोड़ा ने जब 2021 में अचानक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली, तो सब हैरान रह गए। लेकिन उनके लिए ये फैसला आत्मिक था — उन्होंने कहा, अब उनका जीवन श्रीकृष्ण को समर्पित है। आईजी जैसे उच्च पद पर रहकर सब कुछ छोड़ देना आसान नहीं होता, पर भक्ति जब बुलाए, तो भक्त रुकते नहीं।

गुप्तेश्वर पांडेय: डीजीपी से बन गए कृष्णभक्त साधु

बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को अक्सर राजनीति के गलियारों में देखा गया, लेकिन कुछ ही वर्षों में उन्होंने भी संसार से किनारा कर लिया। अब वो न तो वर्दी में नजर आते हैं और न मंचों पर राजनीति करते हुए — बल्कि वे श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे साधु के रूप में देखे जाते हैं, जहां वे जगह-जगह जाकर कृष्ण कथा का प्रचार करते हैं।

किशोर कुणाल: सेवा से सन्यास की ओर

कभी बिहार के सबसे तेज-तर्रार और ईमानदार आईपीएस अफसरों में गिने जाने वाले किशोर कुणाल ने जब नौकरी छोड़ी, तो सब चौंक गए। पर ये त्याग श्रीकृष्ण के लिए नहीं, बल्कि प्रभु श्री हनुमान की सेवा के लिए था। आज वे महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव हैं और अपने सामाजिक व आध्यात्मिक योगदान से लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।

डीके पांडा: जब राधा बन गए एक अधिकारी

उत्तर प्रदेश के आईपीएस डीके पांडा की कहानी सबसे अलग है। मीरा की तरह वे कान्हा की भक्ति में इस कदर रमे कि एक दिन सब कुछ छोड़, राधा के रूप में खुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने दावा किया कि श्रीकृष्ण ने उन्हें सपने में दर्शन देकर बताया कि वे उनकी राधा हैं। फिर क्या था, उन्होंने लड़कियों के वस्त्र पहनने शुरू कर दिए, श्रृंगार किया और खुद को राधा स्वीकार कर लिया।

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