प्रयागराज में वकील की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले दरोगा शैलेंद्र सिंह की जिंदगी ने 10 साल बाद फिर नया मोड़ लिया। लेकिन इस कठिन सफर में सबसे बड़ी ताकत और सहारा बने तत्कालीन एसएसपी और वर्तमान में आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार।
ये था मामला
मामला 11 मार्च 2015 का है, जब प्रयागराज के सीजेएम कोर्ट के पास दरोगा शैलेंद्र और वकील नबी अहमद के बीच कहासुनी हुई, जो गोली चलने तक पहुंच गई। घटना में वकील की मौत हो गई, और शैलेंद्र को जेल भेज दिया गया। रायबरेली कोर्ट ने 2022 में उन्हें उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इस दौरान उनका केस कोई वकील लड़ने को तैयार नहीं था।
आईपीएस दीपक कुमार ने दिया साथ
यहीं पर दीपक कुमार का साथ अहम साबित हुआ। घटना के वक्त वे प्रयागराज के SSP थे। ट्रांसफर होने के बाद भी उन्होंने शैलेंद्र के परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखा और हर संभव मदद की। यहां तक कि हाईकोर्ट में अपील और 2023 में मिली जमानत तक उनका समर्थन जारी रहा।
जमानत के बाद शैलेंद्र की पहली पोस्टिंग आगरा कमिश्नरेट में हुई, जहां उन्होंने 10 साल 5 महीने बाद वर्दी पहनी। वर्दी पहनते ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े और इस भावुक पल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
आंबेडकर नगर में राजे सुल्तानपुर के गांव तिहाड़तपुर के निवासी हैं। आगरा आकर उन्होंने वर्दी पहनी। शैलेंद्र कहते हैं, “सबने साथ छोड़ दिया, लेकिन दीपक कुमार ने नहीं छोड़ा।” यही भरोसा और सहयोग उनकी नई शुरुआत की असली ताकत बना।