गाजियाबाद। इस बार मसूरी पुलिस की दिवाली थाने में नहीं, बल्कि झुग्गियों के बीच मनी। वर्दी पहने जवान जब हाथ में मिठाई के डिब्बे और गिफ्ट लेकर बस्ती में पहुंचे, तो वहां का माहौल ही बदल गया। बच्चे दौड़कर पुलिस के पास आ गए, महिलाओं के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।
पुलिस अफसरों के निर्देश पर हुआ कार्यक्रम
यह पूरा कार्यक्रम बड़े अधिकारियों के निर्देश पर रखा गया था। मकसद साफ था – दिवाली की रोशनी सिर्फ बड़े घरों तक न रहे, उन घरों तक भी पहुंचे जहां त्योहार मनाने के लिए पैसे कम पड़ जाते हैं।
एसीपी मसूरी सुनील कुमार भारद्वाज और थाना प्रभारी हरेंद्र मलिक के नेतृत्व में पुलिस टीम एक-एक बस्ती में गई। पुलिसवालों ने किसी को डांटा नहीं, किसी से पूछताछ नहीं की। इस बार वो सिर्फ मिलने आए थे। उन्होंने बच्चों से हाथ मिलाया, उन्हें प्यार से दिवाली मुबारक कहा और तोहफे थमाए।
बच्चों को मिठाई मिली तो किसी ने तुरंत डिब्बा खोल लिया, कोई अपना गिफ्ट दोस्तों को दिखाने लगा। एक बच्चे ने तो पुलिस की टोपी पहनकर फोटो भी खिंचवाई। सुनील कुमार भारद्वाज और हरेंद्र मलिक ने बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान देने और नशे व गलत संगत से दूर रहने की सलाह भी दी।
महिलाओं ने बताया ये
बस्ती में रहने वाली महिलाओं ने बताया कि अक्सर पुलिस को देखकर डर लगता था, लेकिन आज पहली बार लगा कि पुलिस भी अपने परिवार जैसी है। उन्होंने पुलिस टीम को धन्यवाद दिया।
दरअसल, पुलिस ये बताना चाहती थी कि उसका काम सिर्फ पकड़ना और चालान करना नहीं है। जब समाज का कोई हिस्सा दुखी हो, तो उसके साथ खड़ा होना भी ड्यूटी का ही हिस्सा है।
इस पहल के बाद बस्ती के लोगों और पुलिस के बीच की दूरी थोड़ी कम हुई है। लोगों को लगा कि वर्दी के पीछे भी एक इंसान है, जो उनकी खुशी में शामिल होना चाहता है।