लखनऊ में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन को लेकर चल रहे विवाद में पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय ने अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन दावों को खारिज किया है, जिनमें उनके पॉडकास्ट के आधार पर CEO चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे थे। राजेश पांडेय का कहना है कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया, जिससे पूरे मामले को लेकर भ्रम की स्थिति बनी।
पॉडकास्ट में कहा ये
राजेश पांडेय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी यह आधिकारिक तौर पर नहीं कहा था कि CEO पद के लिए तैयार किए गए टॉप-3 उम्मीदवारों में उनका नाम शामिल था। उनके मुताबिक, पॉडकास्ट में उन्होंने खुद यह बात कही थी कि उन्हें इस संबंध में ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी। टॉप-3 उम्मीदवारों को लेकर जो जानकारी उनके सामने आई थी, वह मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया में चल रही चर्चाओं के माध्यम से मिली थी।
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने नवनियुक्त CEO सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को लेकर भी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके बयान का ऐसा अर्थ निकाला जा रहा है, मानो उन्होंने जितेंद्र मिश्रा के इंटरव्यू में शामिल होने से ही इनकार कर दिया हो। राजेश पांडेय ने इसे गलत बताया।
उन्होंने बताया कि 11 अगस्त को जब उनका खुद का इंटरव्यू स्लॉट था, उस दौरान उन्हें जितेंद्र मिश्रा वहां दिखाई नहीं दिए थे। लेकिन इसका यह मतलब नहीं निकाला जा सकता कि जितेंद्र मिश्रा का इंटरव्यू हुआ ही नहीं था। राजेश पांडेय ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस दावे को भ्रामक करार देते हुए अपनी स्थिति साफ की।
इस वजह से दी सफाई
दरअसल, आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने राजेश पांडेय के पॉडकास्ट का हवाला देते हुए ट्रस्ट को पत्र भेजकर CEO चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इसके बाद मामला चर्चा में आया। अब राजेश पांडेय के स्पष्टीकरण से विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। उन्होंने अपने बयान को लेकर फैल रही चर्चाओं को तथ्यात्मक रूप से गलत संदर्भ में पेश किए जाने की बात कही है।