प्रदेश में महिलाओं और बच्चों से जुड़े लैंगिक अपराधों की जांच प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सख्त कदम उठाए हैं। डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों और पुलिस कमिश्नरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे संवेदनशील मामलों की जांच अब केवल अनुभवी पुलिस अधिकारियों को ही सौंपी जाए।
ये हैं निर्देश
निर्देशों के अनुसार, इन मामलों की जांच को अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरा कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल करना अनिवार्य होगा। डीजीपी ने कहा है कि देरी से न सिर्फ न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि पीड़ितों को भी लंबा इंतजार करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा संचालित ITSSO (Investigation Tracking System for Sexual Offences) पोर्टल के जरिए इन मामलों की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है। इसी सिस्टम के आधार पर राज्यों की रैंकिंग भी तय होती है, इसलिए जांच में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीजीपी ने कहा ये
डीजीपी ने निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में अनुभवहीन अधिकारियों की नियुक्ति न की जाए और जांच के दौरान अधिकारी को बार-बार न बदला जाए। यदि किसी स्थिति में बदलाव जरूरी हो, तो इसके लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की अनुमति अनिवार्य होगी।
इसके अलावा, अगर आरोपी दूसरे राज्यों में छिपे हों तो उनकी गिरफ्तारी के लिए तुरंत कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए। साथ ही जांच के दौरान अगर धाराओं में बदलाव होता है तो उसकी जानकारी भी पोर्टल पर समय पर अपडेट करनी होगी। पुलिस विभाग का मानना है कि इन नए निर्देशों से जांच प्रक्रिया तेज होगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।