अमेठी के एक छोटे से गांव में रहने वाली श्यामा शुक्ला इन दिनों बेटे की चिंता में हर रात जाग रही हैं। उनका बेटा सुनील शुक्ल, जो उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही है, विभागीय कार्रवाई के बाद निलंबित कर दिया गया। लेकिन मां को सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात की है कि जिस बेटे को उन्होंने ईमानदारी का रास्ता सिखाया, आज वही सवालों के घेरे में खड़ा है।
क्या कहती हैं सिपाही की मां
श्यामा शुक्ला कहती हैं कि उनका परिवार हमेशा साधारण जिंदगी जीता आया है। पति हरिकरन शुक्ल होमगार्ड थे और मेहनत से घर चलाते थे। बेटे सुनील ने भी नौकरी मिलने के बाद कभी गलत रास्ता नहीं चुना। मां के मुताबिक, उसने रिश्वत और गलत कामों से दूरी बनाई, लेकिन यही बात अब उसके लिए परेशानी बन गई।
मां का आरोप है कि विभाग में भ्रष्टाचार की बात सामने लाने के बाद से परिवार पर दबाव बढ़ गया। देर रात पुलिस के घर पहुंचने से पूरा परिवार सहम गया। बीमार और बुजुर्ग मां के लिए यह सब किसी सदमे से कम नहीं था। वह कहती हैं कि गांव में लगातार पुलिस आने से लोग तरह-तरह की बातें करने लगे हैं और परिवार मानसिक तनाव झेल रहा है।
भर आती हैं आंखें
श्यामा शुक्ला की आंखें भर आती हैं जब वह बेटे का जिक्र करती हैं। उनका कहना है कि “हमने उसे हमेशा मेहनत और ईमानदारी की सीख दी। कभी नहीं सोचा था कि सच बोलने की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
अब परिवार की मांग सिर्फ इतनी है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और बेटे को न्याय मिले। मां को भरोसा है कि अगर सही तरीके से जांच हुई तो सच जरूर सामने आएगा।