आगरा के लोहामंडी थाने में महिला अधिवक्ता और पुलिसकर्मियों के बीच हुआ विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। मामले की जांच के बाद डीसीपी सिटी ने एक दरोगा समेत तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। जांच में छेड़छाड़ के आरोप साबित नहीं हुए, लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने के चलते यह कदम उठाया गया।
ये था मामला
बताया जा रहा है कि 11 मार्च को महिला अधिवक्ता एक मारपीट के मामले में अपने मुवक्किल के साथ थाने पहुंची थीं। यहां मेडिकल से जुड़ी प्रक्रिया (मजरूबी चिट्ठी) को लेकर उनकी पुलिसकर्मियों से बहस हो गई। विवाद के दौरान अधिवक्ता की बहन ने घटना का वीडियो बनाना शुरू किया, जिस पर कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने आपत्ति जताई।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उनकी बहन के साथ भी गलत हरकत की गई। घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया। इसके बाद अधिवक्ता ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की।
कोर्ट के निर्देश पर डीसीपी सिटी की ओर से पूरे प्रकरण की जांच कराई गई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और अन्य तथ्यों को खंगाला गया। इसमें छेड़छाड़ या मोबाइल छीनने जैसे आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। हालांकि यह जरूर सामने आया कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और आवश्यक कार्रवाई में देरी की।
ये हुए लाइन हाजिर
इसी लापरवाही को आधार बनाते हुए दरोगा अनुज मिश्रा, हेड मोहर्रिर उस्मान खान और मुंशी मुनेंद्र को लाइन हाजिर किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिसकर्मियों से अपेक्षा होती है कि वे हर मामले में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखाएं, लेकिन इस घटना में यह कमी स्पष्ट नजर आई। वहीं अधिवक्ता अब आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत साक्ष्य प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।