लखनऊ में पुलिस मुख्यालय पर आयोजित एक विशेष कार्यशाला में राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मानव तस्करी के विरुद्ध कड़े और समन्वित कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग इकाइयों को निर्देश दिया कि वे अपने खुफिया तंत्र को और मजबूत बनाएं तथा उन क्षेत्रों की पहचान करें जहां इस अपराध की संभावना अधिक रहती है। साथ ही, ऐसे स्थानों पर नियमित रूप से रेस्क्यू अभियान चलाने और नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल के साथ मिलकर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
डीजीपी ने दिए निर्देश
उन्होंने रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों जैसे संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने की बात कही। डीजीपी के अनुसार मानव तस्करी केवल एक संगठित अपराध नहीं, बल्कि यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और आधुनिक समय की सबसे अमानवीय प्रथाओं में से एक है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 2016 से 2025 के बीच राज्य में मानव तस्करी के कुल 1,010 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 832 मामलों में पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इसके अतिरिक्त, विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले अवैध एजेंटों के खिलाफ प्रवासन अधिनियम के तहत 342 मामले दर्ज किए गए हैं।
इन्हें किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच विवेचकों और पांच एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारियों को सम्मानित भी किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न जिलों से आए अधिकारियों, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के समन्वयकों, जीआरपी और आरपीएफ सहित अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
करीब 350 से अधिक पुलिसकर्मियों को इस दौरान मानव तस्करी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे इस अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।