लखनऊ में रविवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब गोमती नगर इलाके से एक सिपाही के कथित अपहरण की खबर तेजी से फैलने लगी। इंटरनेट मीडिया पर वायरल संदेशों में दावा किया गया कि टहलने निकले पुलिसकर्मी को कुछ लोग जबरन गाड़ी में बैठाकर ले गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई और मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।
ये है मामला
घटना ग्वारी गांव की है, जहां निवासी सिपाही अखिलेश त्रिपाठी सुबह करीब नौ बजे अपने दो बेटों के साथ टहल रहे थे। परिजनों के अनुसार, तभी एक काली स्कॉर्पियो वहां आकर रुकी। वाहन से उतरे लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और अखिलेश त्रिपाठी को अपने साथ ले गए। पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं सके। बच्चों ने घबराकर स्थानीय थाने को सूचना दी, जिसके बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रारंभिक तौर पर मामला अपहरण का प्रतीत हुआ। गोमती नगर पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की और संबंधित एजेंसियों से संपर्क साधा। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरी तस्वीर बदल दी। पता चला कि अखिलेश त्रिपाठी राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में दर्ज वर्ष 2002 के एक धोखाधड़ी मामले में वांछित थे। इस प्रकरण में उन पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था।
लंबे समय से थी तलाश
सूत्रों के मुताबिक, गंगापुर सिटी थाने की राजस्थान पुलिस लंबे समय से उनकी तलाश में थी। लोकेशन ट्रेस होने के बाद टीम लखनऊ पहुंची और कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई। स्पष्टीकरण के बाद लखनऊ पुलिस ने अपहरण की अफवाहों को खारिज किया और स्थिति साफ की। मामले के खुलासे के बाद स्थानीय स्तर पर फैली दहशत कम हुई, जबकि विभागीय हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।