50 से ज्यादा एनकाउंटर करने वाले DSP डीके शाही को फिर मिला राष्ट्रपति सम्मान

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उत्तर प्रदेश एसटीएफ के डिप्टी एसपी धर्मेश कुमार शाही एक बार फिर अपने काम को लेकर चर्चा में हैं। उन्हें पांचवीं बार राष्ट्रपति वीरता पदक दिए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान उन्हें मथुरा में एक लाख रुपये के इनामी अपराधी पंकज यादव के एनकाउंटर में अहम भूमिका निभाने के लिए दिया जा रहा है। पंकज यादव लंबे समय से पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था और उस पर हत्या, लूट और रंगदारी जैसे 45 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज थे।

पंकज यादव का नाम माफिया मुख्तार अंसारी और शहाबुद्दीन गैंग से जुड़ा हुआ था। पुलिस के लिए वह लगातार चुनौती बना हुआ था। ऐसे खतरनाक अपराधी को ढेर करना एसटीएफ की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। इस कार्रवाई का नेतृत्व डिप्टी एसपी डीके शाही ने किया था, जिसके चलते उन्हें एक बार फिर वीरता पदक से सम्मानित किया जा रहा है।

पा चुके हैं कई ईनाम

डीके शाही इससे पहले भी कई बार अपनी बहादुरी और रणनीतिक कौशल के लिए सम्मान पा चुके हैं। उन्होंने आतंकी जलालुद्दीन, इनामी अपराधी सुनील शर्मा, हरीश पासवान और फिरोज पठान जैसे कुख्यात अपराधियों के खिलाफ सफल ऑपरेशन किए हैं। यही वजह है कि उन्हें एसटीएफ के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है।

सितंबर 2024 में सुल्तानपुर डकैती कांड के दौरान वांटेड बदमाश मंगेश यादव के एनकाउंटर के बाद डीके शाही अचानक सुर्खियों में आ गए थे। उस समय एनकाउंटर के दौरान उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी, जिसमें वह चप्पल पहने हुए नजर आए थे। यह तस्वीर चर्चा का विषय बन गई थी और इसने राजनीतिक बयानबाजी को भी हवा दी थी।

इस एनकाउंटर को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए थे और कार्रवाई पर टिप्पणी की थी। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भी इस पर तंज कसा था। हालांकि, इन तमाम राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बावजूद पुलिस रिकॉर्ड और ऑपरेशन की सफलता पर कोई असर नहीं पड़ा।

अब तक किए 50 से ज्यादा एंकाउटर

डीके शाही अब तक 50 से ज्यादा एनकाउंटर में शामिल रह चुके हैं। उन्होंने कई दुर्दांत अपराधियों को या तो गिरफ्तार कराया है या उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है। पांचवीं बार राष्ट्रपति वीरता पदक मिलना उनकी लगातार सक्रियता, साहस और पुलिस सेवा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

उत्तर प्रदेश एसटीएफ में डीके शाही आज भी एक ऐसे अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी मौजूदगी मात्र से अपराधियों में डर और पुलिस बल में भरोसा पैदा होता है। उनका यह सम्मान न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरी एसटीएफ के लिए गर्व का विषय भी माना जा रहा है।

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