लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों से होने वाली मौतों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने नए साल के साथ अपनी रणनीति को और आक्रामक बना दिया है। लंबे समय से सड़क दुर्घटनाओं में सर्वाधिक मौतों वाले राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश की छवि बदलने के लिए पुलिस ने दुर्घटना संभावित इलाकों पर सीधा फोकस किया है।
20 जिलों में जगहें चिह्नित
सड़क दुर्घटना के मामले में लखनऊ, कानपुर नगर, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, प्रयागराज, बुलंदशहर, उन्नाव, हरदोई, अलीगढ़, मथुरा, बरेली, फतेहपुर, सीतापुर, गोरखपुर, बाराबंकी, कुशीनगर, जौनपुर, बदायूं, फिरोजाबाद व आजमगढ़ को संवेदऩशील जिलों की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इन जिलों के अंतर्गत 233 थाना क्षेत्रों में कुल 3233 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां बार-बार हादसे हो रहे थे। इन स्थानों को “हाई रिस्क जोन” मानते हुए वहां विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।
दुर्घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण और घायलों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुलिस ने विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें शिफ्ट के आधार पर 24 घंटे तैनात रहकर न केवल यातायात पर नजर रख रही हैं, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तत्काल मेडिकल सहायता भी सुनिश्चित कर रही हैं।
ये हैं आंकड़े
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में 23,652 लोगों की मौत हुई थी। इसी आंकड़े को आधार बनाकर डीजीपी राजीव कृष्ण ने “जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट” कार्यक्रम की शुरुआत की और इसके लिए एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गई। इसके तहत 89 संवेदनशील कॉरिडोर चिह्नित कर 323 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमें बनाई गईं।
पुलिस के अनुसार दिसंबर 2024 और दिसंबर 2025 के आंकड़ों की तुलना करने पर सड़क दुर्घटनाओं में 11.70 प्रतिशत और मौतों में 6.01 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वहीं घायलों की संख्या में भी 7.12 प्रतिशत की गिरावट आई है।
दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों पर रोशनी की बेहतर व्यवस्था, स्पीड ब्रेकर, सड़क के गड्ढों की मरम्मत, चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर और अवैध पार्किंग पर रोक जैसे कदम उठाए गए हैं। साथ ही स्थानीय लोगों और दुकानदारों को भी जागरूक किया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि यह प्रयास शुरुआती स्तर पर सफल रहा है और आने वाले समय में सड़क हादसों में और कमी लाने का लक्ष्य तय किया गया है।