तेजी से बदलती तकनीक ने जहां आम जीवन को आसान बनाया है, वहीं अपराध के नए रास्ते भी खोल दिए हैं। आज अपराधी साइबर ठगी, डिजिटल साजिशों और एआई आधारित तरीकों से वारदात को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में पारंपरिक पुलिसिंग अब पर्याप्त नहीं रह गई है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव करने जा रही है।
नयी चुनौतियों को तैयार
आठ वर्षों बाद बदले जा रहे इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य पुलिस को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। नए पाठ्यक्रम में कानून और अनुशासन के साथ-साथ तकनीकी दक्षता पर खास फोकस किया गया है। सिपाही, दरोगा और सीओ स्तर तक के अधिकारियों को डिजिटल जांच, साइबर अपराध, फोरेंसिक साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग दी जाएगी।
इंडोर ट्रेनिंग में डिजिटल पुलिसिंग को प्रमुख स्थान दिया गया है। पुलिसकर्मियों को यह सिखाया जाएगा कि ऑनलाइन अपराधों की जांच कैसे की जाए, डिजिटल सबूतों को सुरक्षित कैसे रखा जाए और न्यायालय में उन्हें प्रभावी ढंग से कैसे पेश किया जाए। वहीं आउटडोर ट्रेनिंग में स्मार्ट क्राउड कंट्रोल और तकनीक आधारित कानून व्यवस्था बनाए रखने की रणनीतियां सिखाई जाएंगी।
नए पाठ्यक्रम में अचानक होने वाले विरोध-प्रदर्शन, सोशल मीडिया से फैलने वाली अफवाहों और धार्मिक-राजनीतिक आयोजनों के दौरान कानून व्यवस्था संभालने की भी विशेष ट्रेनिंग शामिल है। इसके साथ ही एनआईए, सीबीआई, आईबी, आर्मी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कार्य तरीकों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
डीजी ने दी जानकारी
डीजी ट्रेनिंग राजीव सभरवाल के अनुसार, यह नया पाठ्यक्रम पुलिस को तकनीकी रूप से मजबूत, कानूनी रूप से सक्षम और जनता के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएगा। शासन से अनुमति मिलने के बाद अप्रैल-मई में आने वाले नए बैच इस आधुनिक ट्रेनिंग का लाभ उठाएंगे, जिससे यूपी पुलिस भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले से कहीं अधिक तैयार नजर आएगी।