UP Police के IPS मोहम्मद मुश्ताक ने चैत्र नवरात्रि पर पेश की मिसाल, कन्या पूजन का वीडियो हुआ वायरल

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उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के एसपी, आईपीएस मोहम्मद मुश्ताक, इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी एक नेक पहल के कारण चर्चा में हैं। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर उन्होंने अपनी पत्नी के साथ पूरे श्रद्धा और विधि-विधान से कन्याओं का पूजन किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि वे न सिर्फ कन्याओं के पैर धोकर सम्मान दे रहे हैं, बल्कि उनके प्रति आस्था और सम्मान का संदेश भी समाज तक पहुंचा रहे हैं।

वायरल हो रहा वीडियो

मोहम्मद मुश्ताक की यह पहल केवल धार्मिक प्रथा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सर्वधर्म समभाव और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी पेश करती है। सोशल मीडिया पर उनका यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे देखकर उनकी तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने इस कदम को समाज में भाईचारे और समानता के प्रतीक के रूप में देखा है।

कौन हैं ये आईपीएस

करियर की बात करें तो मोहम्मद मुश्ताक का करियर भी उनके समर्पण और दक्षता का उदाहरण है। उनका जन्म 15 जून 1988 को बिहार के छपरा जिले के जनता बाजार गांव में हुआ था। उन्होंने 2008 में पटना विश्वविद्यालय से BA की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद 2011 में उन्हें बिहार पीसीएस और एसएसबी असिस्टेंट कमांडेंट के पदों पर चयन मिला, लेकिन उन्होंने इन अवसरों को ठुकरा दिया और यूपीएससी की तैयारी में लग गए। 2013 में उन्होंने IRS अधिकारी के रूप में सेवा शुरू की और उसी समय से दिन में ड्यूटी और रात में सिविल सर्विसेज की तैयारी करते रहे।

2016 में आईपीएस अधिकारी बने और पहली पोस्टिंग झांसी में एएसपी के रूप में हुई। इसके बाद वाराणसी, आगरा और GRP में तीन साल तक एसपी के पद पर काम किया। उनके नेतृत्व में ‘ऑपरेशन मुस्कान’ और ‘ऑपरेशन स्माइल’ जैसी पहलें हुईं, जिनके तहत उन्होंने कई बिछड़े बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाया। उनका करियर न केवल प्रोफेशनल उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि समाज सेवा और संवेदनशीलता का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है।

ललितपुर में दिया उदाहरण

ललितपुर में उनकी यह पहल उनके संवेदनशील और समाज-सुधारक दृष्टिकोण को उजागर करती है। नवरात्रि पर कन्या पूजन का यह वीडियो न केवल उनकी निजी आस्था को दर्शाता है, बल्कि समाज में भाईचारा और समानता का संदेश भी फैलाता है। मोहम्मद मुश्ताक की इस नेक पहल ने दिखा दिया कि पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज में नैतिक और सांप्रदायिक एकता का उदाहरण भी बन सकता है।

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