जेल की दीवार तोड़कर फरार हुए दो बंदी, अयोध्या जिला कारागार के 10 अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड

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अयोध्या जिला कारागार से दो विचाराधीन बंदियों के फरार होने की घटना ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में लापरवाही सामने आने के बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर सहित कुल दस जेलकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई अयोध्या रेंज के डीआईजी द्वारा सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

ये हुए फरार

फरार हुए बंदियों में अमेठी जिले के मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र का निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज शामिल है, जो दुष्कर्म के एक मामले में 14 सितंबर 2025 से जेल में बंद था। वहीं दूसरा बंदी सुल्तानपुर के रौदी गांव का रहने वाला शेर अली है, जो डकैती के मामले में 28 नवंबर 2024 से जिला कारागार में निरुद्ध था। इन दोनों बंदियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, चोरी और छेड़खानी जैसे गंभीर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।

बुधवार रात दोनों बंदियों ने बैरक की दीवार तोड़कर जेल से फरार होने की योजना को अंजाम दिया। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया। डीजी जेल पीसी मीणा ने बताया कि प्रारंभिक जांच की जिम्मेदारी अयोध्या रेंज के डीआईजी शैलेंद्र कुमार मैत्रेय को सौंपी गई थी।

ये हुए सस्पेंड

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक हुई है और जेल प्रशासन के कई अधिकारी व कर्मचारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाह पाए गए।

इसके बाद जेल के वरिष्ठ अधीक्षक उदय प्रताप मिश्र, जेलर जितेंद्र कुमार यादव, डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी, हेड जेल वार्डर हरिहर प्रसाद व त्रिपुरारी मिश्र समेत जेल वार्डर सुरेश कुमार दुबे, जयप्रकाश यादव, सुनील कुमार, रमेश सहानी, रवि यादव और मनोज को निलंबित कर दिया गया।

इसके साथ ही सभी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने जेल सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

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