हर वर्ष 21 अक्तूबर को देशभर में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। ये दिन उन पुलिसकर्मियों की स्मृति और सम्मान का प्रतीक है, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। इस वर्ष भी उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में यह दिन श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ मनाया जा रहा है।
देशभर में कुल 186 पुलिसकर्मी शहीद
जानकारी के मुताबिक, 1 सितंबर 2024 से 31 अगस्त 2025 के बीच देशभर में कुल 186 पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहादत दी। इनमें उत्तर प्रदेश पुलिस के तीन बहादुर जवान शामिल हैं – एसटीएफ के इंस्पेक्टर सुनील कुमार, जौनपुर के हेड कांस्टेबल दुर्गेश कुमार सिंह और नोएडा के कांस्टेबल सौरभ कुमार। राजधानी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन शहीदों के परिजनों को सम्मानित करेंगे।
इंस्पेक्टर सुनील कुमार, 20 जनवरी 2025 को शामली में एक इनामी बदमाश की तलाश में अपनी टीम के साथ गए थे। मुठभेड़ के दौरान उन्होंने बहादुरी से जवाबी कार्रवाई की, लेकिन गंभीर रूप से घायल हो गए और 22 जनवरी को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
हेड कांस्टेबल दुर्गेश कुमार सिंह ने 12 मई को जौनपुर में गो-तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जान गंवाई। अपराधियों ने पुलिस टीम पर वाहन चढ़ा दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में अस्पताल में उनका निधन हो गया।
कांस्टेबल सौरभ कुमार ने 25 मई को गाजियाबाद में एक वांछित अपराधी की गिरफ्तारी के दौरान गोलीबारी में वीरगति पाई। उन्होंने अंतिम सांस तक डटे रहकर अपने कर्तव्य का निर्वहन किया।
1959 में हुई शुरुआत
पुलिस स्मृति दिवस की शुरुआत 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों के हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के 10 जवानों की स्मृति में हुई थी। तब से यह दिन हर वर्ष उन सभी वीरों को समर्पित किया जाता है जिन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अपने प्राणों की आहुति दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और उनके परिवारों को राज्य की ओर से सम्मानित करेंगे। कार्यक्रम में शोक सलामी दी जाएगी, शहीदों के नामों का वाचन होगा और उनकी सेवा को याद करते हुए कृतज्ञता प्रकट की जाएगी।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि पुलिसकर्मी केवल वर्दीधारी नहीं, बल्कि समाज के लिए अपने जीवन को न्यौछावर करने वाले सच्चे रक्षक हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस अपने समर्पण, साहस और अनुशासन के लिए जानी जाती है, और इन तीन वीरों की शहादत उस परंपरा का प्रतीक है।