आगरा में खाकी की हैवानियत का चेहरा फिर बेनकाब हुआ है। कानून के रखवाले ही जब कानून तोड़ने लगें, तो आम आदमी के पास बचता ही क्या है—यह सवाल एक दूध बेचने वाले युवक की टूटी हड्डियों और उखड़े नाखूनों में साफ नजर आता है। आइए आपको बताते हैं क्या है मामला…..
इसलिए भड़के दारोगा साहब
जीवनी मंडी पुलिस चौकी में जो हुआ, वह किसी अपराधी के साथ नहीं बल्कि रोज़ी-रोटी कमाने वाले युवक के साथ हुआ। वजह सिर्फ इतनी थी कि वह पुलिस को ऑटो से थाने तक छोड़ने में असमर्थ था।
पीड़ित युवक, जो ई-ऑटो से दूध सप्लाई करता है, ने जब यह कहा कि वह वाहन सही ढंग से नहीं चला पाता, तो यह जवाब चौकी प्रभारी को नागवार गुजरा। गुस्से में तमतमाए अधिकारी ने सड़क पर ही डंडा उठा लिया। देखते ही देखते वर्दी वालों ने उसे घेर लिया।
जब युवक ने मारपीट का सबूत जुटाने के लिए मोबाइल निकाला, तो पुलिस ने फोन छीन लिया। इसके बाद उसे जबरन बाइक पर बैठाकर चौकी ले जाया गया। वहां जो हुआ, वह किसी थर्ड डिग्री से कम नहीं था।
चौकी के अंदर एक सिपाही ने युवक के पैर पकड़ रखे थे और दूसरा डंडे बरसा रहा था। मार इतनी बेरहमी से पड़ी कि डंडे टूट गए। इसके बाद भी जब संतोष नहीं हुआ तो प्लास मंगवाकर पैर के नाखून उखाड़ दिए गए। दर्द से तड़पते युवक की चीखें चौकी की दीवारों में दबा दी गईं।
इतना सब करने के बाद उल्टा उसी युवक पर शांति भंग का मामला दर्ज कर दिया गया, ताकि पुलिस की बर्बरता पर पर्दा डाला जा सके। युवक का ऑटो भी जब्त कर चौकी में खड़ा करा दिया गया।
किया गया निलंबित
पीड़ित के भाई ने किसी तरह एसीपी कोर्ट से जमानत कराई। मामला सामने आने पर उच्च अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए जीवनी मंडी चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ निलंबन ऐसी क्रूरता का जवाब हो सकता है?