6 साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ, NHRC की सख्ती से फिर चर्चा में कानपुर बैरक हादसा

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कानपुर पुलिस लाइन में वर्ष 2020 में हुए बैरक हादसे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब छह साल बीत जाने के बावजूद हादसे में गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मियों को मुआवजा नहीं मिल सका है। अब इस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है।

ये है मामला 

24 अगस्त 2020 को कानपुर पुलिस लाइन की लगभग 105 साल पुरानी बैरक की छत अचानक भरभराकर गिर गई थी। इस दर्दनाक हादसे में सिपाही अरविंद सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों को इलाज के लिए रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां लंबे इलाज के बाद वे स्वस्थ हो पाए।

हादसे के बाद तत्कालीन एसएसपी कानपुर प्रीतिंदर सिंह ने मृतक के परिजनों और घायलों को मुआवजा देने की घोषणा की थी। मृतक सिपाही के परिवार को तो मुआवजा मिल गया, लेकिन घायल पुलिसकर्मियों को आज तक राहत नहीं मिल सकी।

मामले में इंजीनियर पंकज कुमार ने 12 अक्टूबर 2020 को NHRC में शिकायत दर्ज कराई थी। 22 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान आयोग ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। NHRC ने मुख्य सचिव और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर मुआवजे की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने मांगा प्रमाण

आयोग ने साफ कहा है कि यदि मुआवजा दिया जा चुका है तो उसके दस्तावेजी प्रमाण पेश किए जाएं, अन्यथा इसे मानवाधिकार उल्लंघन माना जाएगा। छह साल बाद भी न्याय की आस लगाए घायल पुलिसकर्मियों को अब आयोग की सख्ती से उम्मीद जगी है।

 

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