श्रीनगर के नौगाम थाने में शुक्रवार देर रात हुआ विस्फोट अब एक बड़े हादसे के रूप में सामने आ रहा है। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह कोई आतंकी हमला नहीं था, बल्कि जब्त किए गए रसायनों की फोरेंसिक जांच के दौरान हुई गंभीर चूक इसका कारण बनी। इस धमाके में अब तक नौ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई घायलों का उपचार जारी है।
ऐसे हुआ हादसा
जांच टीम के अनुसार, फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से बरामद किए गए रासायनिक पदार्थ—एसिटोफेनोन, हाइड्रोजन पेरोक्साइड और सल्फ्यूरिक एसिड—को नौगाम थाने में जांच के लिए रखा गया था।
इन्हीं के मिश्रण का नमूना तैयार करते समय तेज रोशनी पड़ने से अचानक रिएक्शन हुआ और वह पल भर में भीषण धमाके में बदल गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन एसीटोन पेरोक्साइड जैसे उच्च संवेदनशील विस्फोटक के निर्माण में उपयोग होने वाले तत्व हैं, इसलिए हल्की असावधानी भी भारी पड़ सकती है।
थाने में करीब 360 किलो रासायनिक सामग्री एक साथ रखी हुई थी, जिससे विस्फोट की तीव्रता और बढ़ गई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि थाने का बड़ा हिस्सा धराशायी हो गया और आसपास के क्षेत्र में भी कंपन महसूस किया गया।
डीजीपी ने दी जानकारी
डीजीपी नलिन प्रभात और संयुक्त सचिव (कश्मीर) प्रशांत लोखंडे ने प्रेस ब्रीफिंग में साफ कहा कि यह पूरी तरह एक दुर्घटना थी। उन्होंने बताया कि फोरेंसिक टीम रसायनों की संवेदनशील प्रकृति को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरत रही थी, लेकिन नमूने से छेड़छाड़ के दौरान अचानक यह हादसा हो गया। जांच की निगरानी शहर के एसएसपी डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती कर रहे हैं।
यह मामला उस व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क की जांच से भी जुड़ा है, जिसका पर्दाफाश पिछले महीने हुआ था। नौगाम में लगाए गए भड़काऊ पोस्टरों की जांच से शुरू बनी यह कड़ी डॉक्टरों, मौलवी और अन्य लोगों तक जा पहुंची।
इसी केस से जुड़े रसायन और बरामदगी नौगाम थाने में सुरक्षित रखी गई थी। पुलिस ने इस मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के दो डॉक्टरों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इसी मॉड्यूल के सदस्य उमर नबी पर लाल किला क्षेत्र में धमाका करने का आरोप है।