इटावा में ज़मीन को लेकर उपजे पारिवारिक विवाद ने बुधवार को एक ऐसा मोड़ ले लिया, जिसकी कल्पना खुद पीड़ित पक्ष ने भी नहीं की थी। रिटायर्ड दारोगा गंगाप्रसाद ने अपनी ही बेटी और दामाद पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पुलिस चौकी में बुलाकर सिपाहियों से पिटवाया गया। यही नहीं, उनकी पत्नी और बेटों को भी कथित रूप से मारपीट कर घायल कर दिया गया।
ये है मामला
यह घटना इकदिल क्षेत्र की कुरिट चौकी से जुड़ी है। रिटायर दरोगा गंगाप्रसाद ने बताया कि वर्षों पहले उन्होंने रामपुर नावली गांव में खेती योग्य ज़मीन ली थी। अपनी बेटी पूजारानी और दामाद सुशील कुमार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने कुछ समय के लिए वह ज़मीन जोतने-बोने के लिए उन्हें सौंप दी थी। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जब वे आगरा शिफ्ट हो गए, तो कथित रूप से दामाद ने वह ज़मीन बेचने की कोशिश शुरू कर दी।
तीन मई को जब उन्हें जानकारी मिली कि सुशील कुमार ने जमीन बेचने के लिए 11 लाख रुपये एडवांस में ले लिए हैं, तो वे पत्नी और बेटों के साथ मौके पर पहुंचे। वहां कहासुनी बढ़ गई और मामला पुलिस चौकी तक जा पहुंचा। लेकिन चौकी पर मौजूद सिपाही ललित कुमार और प्रमोद कुमार सिंह पर रिटायर्ड दरोगा ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले से ही बेटी-दामाद के साथ मिलकर योजना बना रखी थी।
गंगाप्रसाद का कहना है कि चौकी पर सिपाहियों ने उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट शुरू कर दी। जब उनकी पत्नी रामकटोरी बीच-बचाव करने आईं, तो उन्हें भी नहीं बख्शा गया। उनके बेटे हरेन्द्र सिंह ने इस घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की, तो उसे भी बुरी तरह पीटा गया। साथ में मौजूद उनके परिचित मनोज, मनीष और लवलेश को चौकी में बंद कर दिया गया और कथित रूप से बर्बरता से पीटा गया।
केस हुआ दर्ज
वहीं, सिपाही प्रमोद कुमार ने खुद को भी घायल दिखाकर मेडिकल कराया और उल्टा मारपीट का मुकदमा दारोगा और उनके बेटों पर दर्ज करा दिया। इसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया। जब वे जमानत पर रिहा हुए और 5 जून को अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे, तो फिर से झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
आख़िरकार, कोर्ट की शरण लेने के बाद गंगाप्रसाद की शिकायत पर बेटी, दामाद और दोनों सिपाहियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है।