Crime

Manish Murder Case: जय- वीरू जैसे दोस्त हैं जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा, पढ़ें- दोनों कैसे बन गए सिपाही से इंस्पेक्टर

Manish Murder Case: जय- वीरू जैसे दोस्त हैं जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा, पढ़ें- दोनों कैसे बन गए सिपाही से इंस्पेक्टर

पिछले पांच दिनों से मीडिया की सुर्खियों में एक ही खबर छाई रही, वो है गोरखपुर की पुलिस की कार्यशैली। दरअसल, कानपुर से गोरखपुर दोस्तों संग घुमने आए मनीष गुप्ता हत्याकांड के आरोपियों के किस्सों की लंबी फेहरिस्त है। वहीं, इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी बनाए गए इंस्पेक्टर जेएन सिंह और सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्र की दोस्ती फिल्म शोले के जय- वीरू से कहीं कम नहीं है। यह दोनों अपनी गहरी दोस्ती के लिए काफी चर्चित भी हैं।

स्पेशल डिमांड पर मिलता था प्रमोशन

यही वजह है कि बीते फरवरी महीने में इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने तत्कालीन पुलिस कप्तान से स्पेशल डिमांड कर अक्षय मिश्रा की पोस्टिंग कराई थी। पुलिस कप्तान ने भी दोनों को एक पीड़ित की मदद करने की जिम्मेदारी सौंपते हुए चौकी इंचार्ज रहे भागवत चौधरी को फलमंडी से हटाकर अक्षय मिश्रा को पोस्ट कर दिया।

 जय-विरू की दोस्ती का काला सच

लेकिन यह भी एक सच है कि पुलिस कप्तान की ओर से दी गई जिम्मेदारी को तो उस वक्त इंस्पेक्टर और चौकी इंचार्ज ने निभाते हुए पीड़ित विजय कसेरा की जमीन पर निर्माण करा दिया, लेकिन हद तो तब हो गई, जब तत्कालीन एसएसपी जोगेंद्र कुमार गोरखपुर से ट्रांसफर होकर चले गए। सीएम योगी के निर्देश पर राजस्व टीम के साथ पुलिस ने जिस जमीन पर खुद खड़े होकर निर्माण कराया, एसएसपी के जाते ही रातों रात वह निर्माण बुल्डोजर से ध्वस्त हो गई। केस भी तत्कालीन एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु के आदेश के बाद ही दर्ज हुआ। लेकिन आज तक हुआ कुछ भी नहीं।

सीएम तक पहुंची रही है रामगढ़ताल पुलिस की शिकायत

इतना ही नहीं, बड़गों की रहने वाली टीचर कुमकुम यादव भी रामगढ़ताल पुलिस पर लिखित आरोप लगा चुकी हैं कि एसएसपी के आदेश पर कराए गए निर्माण को उसी रात दबंगों ने ढहा दिया। इस मामले में तत्कालीन एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने आजाद नगर चौकी इंचार्ज विनोद सिंह को वहां से जांच के बाद हटा भी दिया था, हालांकि उन्हें रिलिव एसएसपी दिनेश प्रभु ने किया। इसके अलावा महेवा बंधे पर स्थित महंत चेतन गिरी भी मुख्यमंत्री के जनता दरबार में जाकर वहां मंदिर कब्जा की शिकायत पर यहां की पुलिस पर भू-माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगा चुके हैं। कई मामलों में तो सीएम ने फटकार लगाते हुए ऐसे थानेदारों को हटाने के भी निर्देश दिए थे, बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बेलीपार एसओ बनवाने की थी तैयारी

वहीं, सूत्रों के मुताबिक इंस्पेक्टर जेएन सिंह और सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा की चर्चा हमेशा जिले भर में चर्चा का विषय रही है। दोनों किसी समय में साथ सिपाही थे। इसके बाद विभागीय परीक्षा देकर सब इंस्पेक्टर बने। बाराबंकी में भी दोनों साथ तैनात रहे। सूत्र बताते हैं कि इस बीच एसओजी और एसटीएफ में ताबड़तोड़ एनकाउंटर कर जेएन सिंह आउट आफ टर्म प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बन गए। गोरखपुर में एक बार फिर दोनों की मुलाकात हो गई।

थाने में जय- वीरू की जोड़ी 

एक थाने में जय- वीरू की जोड़ी साथ भी हो गई। अब अगला कदम अक्षय मिश्रा को बेलीपार एसओ बनवाने का था। इसके लिए पुलिस कप्तान तक फिल्डिंग लगानी शुरू भी हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक बेलीपार मिलने के बाद ​गोरखपुर जिले एक एक बड़ा इलाका इन दोनों थाना क्षेत्रों में आ जाता। लेकिन इस बीच यह कांड हो गया। 

मुख्य संवाददाता

HARSH PANDEY

Police Media News

Leave a comment