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GRP हेड कांस्टेबल के जज्बे को आज मिलेगा सम्मान... ट्रेन में भीख मांगने वाले 150 से ज्यादा बच्चों की बदल दी जिंदगी

GRP हेड कांस्टेबल के जज्बे को आज मिलेगा सम्मान... ट्रेन में भीख मांगने वाले 150 से ज्यादा बच्चों की बदल दी जिंदगी

अक्सर ट्रेन में सफर करते समय आपने या हमने मासूम बच्चों को भीख मांगते हुए देखा होगा। कुछ लोग तो इन बच्चों को पैसे व जरूरी सामान देकर उनकी मदद करते हैं। लेकिन कुछ उन्हें डांटकर वहां से भगा देते हैं। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी यूपी पुलिस का एक वर्दीधारी इन मासूम बच्चों के लिए बड़ा मददगार साबित हुआ है। ट्रेन में भीख मांगने वाले बच्चों के नन्हें हाथों में कलम पकड़ाने वाले जीआरपी के मुख्य आरक्षी रोहित कुमार को मुख्यालय पुलिस महानिदेशक ने सम्मानित करने का फैंसला किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झांसी को इस बारे में पत्र भेजकर 1 सितंबर को वर्किंग यूनिफॉर्म में 1 उपनिरीक्षक को साथ भेजने की बात कही।

पेड के नीचे की स्कूल की शुरूआत

इटावा जिले के भरथना थाना क्षेत्र के मुरैना में रहने वाले आरक्षी रोहित कुमार ने भीख मांगने वाले 4 बच्चों के साथ एक पेड़ के नीचे कक्षा की शुरूआत की थी। लेकिन आज यहां एक विद्यालय का निर्माण हो चुका है। जहां छात्रों की संख्या भी डेढ़ सौ के पार हो गई है। रोहित कुमार फ्रीडम फाइटर परिवार से हैं। जिनके बाबा स्वर्गीय तेज सिंह और नाना रामेश्वर दयाल फ्रीडम फाइटर रह चुके हैं। जबकि पिता चंद्र प्रकाश यादव एयर फोर्स से सेवानिवृत्त। रोहित के मुताबिक उनके गांव में शिक्षा की स्थिति बेहद ही खराब है। लड़कियों को तो काफी ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उनके गांव के आसपास हमेशा पानी भरा रहता था। जिसके बीच से उन्हें पढ़ाई के लिए जाना पड़ता था। दरअसल एक दिन रोहित कुमार उन्नाव से रायबरेली के बीच चलने वाली ट्रेन में ड्यूटी कर रहे थे। कोरारी रेलवे स्टेशन पर कुछ भीख मांग रहे बच्चों पर उनकी नजर गई। ड्यूटी पूरा कर रोहित कुमार कोरारी पहुंचे और उन्होंने बच्चों के साथ उनके अभिभावकों से भी बातचीत कर पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। रेलवे स्टेशन के पास एक पेड़ के सहारे ब्लैकबोर्ड खड़ा करके 4 बच्चों को रोहित कुमार ने पढ़ाना शुरू किया। एक बार शुरुआता हुई तो मलिन बस्ती में रहने वाले तमाम बच्चे वहां पढ़ने के लिए पहुंचे।

स्थानांतरण के साथ विद्यालय आया चर्चा में

दरअसलरोहित कुमार का विद्यालय 'हर हाथ कलम में पाठशाला' उनके स्थानांतरण उन्नाव जंक्शन रेलवे स्टेशन से झांसी सिविल पुलिस में होने के बाद चर्चाओं में आय। उनके स्थानांतरण पर विद्यालय के छात्र व उनके अभिभावकों में उदासी छाई हुई थी। बच्चे अपने रोहित भैया से लिपटकर बिलख बिलखकर रोने लगे। 

एसएसपी ने विद्यालय की देखरेख के दिए निर्देश

पुलिस महानिदेशक कार्यालय द्वारा उनके इस कार्य की सराहा करते हुए 2 सितंबर यानी आज पुरस्कृत करने का फैंसला लिया गया। पूर्व जीआरपी एसएसपी मोहम्मद मुस्ताक लखनऊ और आगरा अनुभाग के निर्देश पर जीआरपी थानाध्यक्ष ने विद्यालय जाकर बच्चों को कलम किताबों आदि का वितरण किया। जीआरपी थानाध्यक्ष राज बहादुर सिंह की माने तो रोहित कुमार की कमी महसूस नहीं होने दी जाएगी। कॉस्टेबल अंकित वर्मा और शिखा तोमर की पाठशाला में ड्यूटी पढ़ाने में लगाई गई है।

लेखक

Madhvi Tanwar

Police Media News

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