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UP में पहली बार SSP विपिन ताडा की पहल... मुखबिरी करेंगे 900 हिस्ट्रीशीटर, संकल्प शिविर में दिलाई शपथ

UP में पहली बार SSP विपिन ताडा की पहल... मुखबिरी करेंगे 900 हिस्ट्रीशीटर, संकल्प शिविर में दिलाई शपथ

यूपी में पहली बार किसी पुलिस अधिकारी के बेहतरीन कार्य का डंका ना केवल लखनऊ पुलिस मुख्यालय में बज रहा है, बल्कि इसी गुंज की सुगबुहाट प्रदेश सरकार में चल रही है। जी हां हम बता कर रहे हैं। सहारनपुर के SSP डॉ.विपिन ताडा की, जिन्होंने ना केवल जिले में बल्कि पूरे प्रदेश में पहली बार एक ऐसी पहल कर डाली है। जिससे एसएसपी की जमकर तारीफे हो रही है। दरअसल एसएसपी विपिन ताड़ा ने संकल्प शिविर का आयोजन कल एक पहल की है। जिसमें 900 से ज्यादा हिस्ट्रीशीटरों को भविष्य में कभी अपराध ना करने की शपथ दिलाई गई है। इसके साथ ही उन्हें अच्छा आचरण रहने पर निगरानी हटाने का भी आश्वासन भी दिया। बता दें कि यह अपनी तरह की अनूठी पहल है। 'संकल्प' शिविर का असली मकसद हिस्ट्रीशीटरों को अपराध न करने के प्रति जागरूक करना था। एसएसपी के इस कार्यक्रम का असली मकसद एक मुखबिर तंत्र को तैयार करना भी है। जी हां... एसएसपी की पहल में हिस्ट्रीशीटर अब क्राइम कंट्रोल कराने में पुलिस को योगदान देंगे। हां, ऐसे में उनकी हिस्ट्रीशीट बंद नहीं होगी।

क्राइम कंट्रोल में हिस्ट्रीशीटरों की मिलेगी मदद 

पुलिसिंग कार्यप्रणाली में 'मैनुअल' शब्द काफी प्रचलित है, जिसका व्यावहारिक अर्थ है, जिसने दशकों तक चोर-पुलिस के खेल में पुलिस को फ्रंट-फुट पर रखा। लेकिन कंप्यूटर और तमाम आधुनिक उपकरणों के साथ 'अपडेट' होती पुलिस का यह हथियार अब जंग खा चुका है। जी हां, बात हो रही है पुलिस के अचूक हथियार रहे मुखबिर तंत्र की। पूर्व में इसे गुप्तचर कहा जाता था। लेकिन अब सहारनपुर के एसएसपी डॉ.विपिन ताडा हिस्ट्रीशीटरों और गैंगस्टरों को अपना मुखबिर बनान रहे हैं, वो भी उन्हें कसम खिलाकर अच्छे कार्यों में शामिल करने पर... एसएसपी ने इन्हें सार्वजनिक तौर पर अपना नंबर भी दिया। लेकिन, मुखबिर तंत्र में वहीं हिस्ट्रीशीटर होंगे, जिनका अपराध से अब कोई नाता नहीं रहा है। या फिर सुधरना चाहते हैं।

सरकारी स्तर से मुखबिरों के लिए आता था पैसा

80 से 90 के दशक में मुखबिर पुलिस के लिए सूचना तंत्र की जान माना जाता था। दारोगा की गोपनीय डायरी में मुखबिरों का नाम हमेशा से ही दर्ज रहा है। ऐसे में सरकारी स्तर से भी मुखबिरों के लिए धनराशि मिला करती थी। मुखबिर तंत्र उस समय उन मामलों को खोलने में प्रख्यात था जो मामले पुलिस के पसीने छूटा देते थे। ऐसे मामलों में मुखबिर ही पुलिस की नैया को मांझी बनकर किनारे लगाता था। लेकिन समय बदलने के साथ पुलिस प्रणाली हाईटेक होती गई और मुखबिर तंत्र खत्म...

अपराधियों ने अपराध का ट्रेंड बदला

पुलिस की माने तो जैसे-जैसे पुलिस की कार्यप्रणाली हाइटेक होती जा रही है। वैसे ही अपराधियों के अपराध को अंजाम देने के तरीकों में भी बड़ा बदलाव देखा गया है। या यूं कहना भी गलत ना होगा की समय बदला तो, ट्रेंड बदल गया। पूर्व में जो कुख्यात अपराधी थे उनमें से ज्यादातार को पुलिस ने ढ़ेर कर दिया है। लेकिन आज के समय में इसी जरायम की दुनिया में नए-नए चेहर एंट्री कर रहे हैं। क्राइम रिकॉर्ड न होना और दूसरे जिलों में जाकर अपराधिक वारदात को अंजाम देना, इस स्थिति में पुलिस के लिए मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ी गई हैं। जिसकी वजह से ज्यादातर मामलों में सर्विलांस के जरिए पुलिस क्राइम का खुलासा करती है। देखा जाए तो पुलिस को एक विश्वस्नीय मुखबिर अब मिल भी नहीं रहे हैं। जिसकी सबसे बड़ी वजह यह भी एक है कि मुखबिरों को पहले की तरह सुरक्षा मुहैय्या नहीं हो पा रही है। 

पुलिस से ना दोस्ती अच्छी ना दुश्मनी

कहा जाता है कि पुलिस से ना दोस्ती अच्छी है और ना दुश्मनी.... इसी कहावत को नजीर बनाते हुए मुखबिर तंत्र से पुलिस में दूरी बनाई। जिसका मुख्य कारण है कि बीते कई वर्षों में पुलिस में मुखबिर तंत्र खत्म ही होता जा रहा है। वजह भी साफ है कि पुलिस अगर किसी अपराधिक वारदात का खुलासा करने में नाकाम रहती है, तो इसका ठीकरा वह थाने के मुखबिर पर ही फोड़कर उसे जेल भेज देती है। लेकिन इसमें पर्याप्त सुरक्षा की कमी सबसे बड़ा कारण है। जो ऐसी वारदातों में मुखबिरों का मनोबल तोड़ने का काम किया है।

अब मुखबिर तंत्र में शामिल होंगे हिस्ट्रीशीटर

एसएसपी डॉ.विपिन ताडा के मुताबिक आज के समय में पुलिस हाईटेक होती जा रही है। इसलिए मुखबिरों का अस्तित्व खत्म कर दिया गया है, लेकिन कभी-कभी देखा गया है कि किसी मामले में जब पुलिस खुद थक जाती है तब वह मुखबिर तंत्र की मदद ले सकती है। इस संकल्प' शिविर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिस्ट्रीशीटरों को अपराध न करने की शपथ दिलाकर उन्हें अच्छे कार्यों को करने के लिए प्रेरित करना है। ऐसे में इन हिस्ट्रीशीटरों से किसी भी तरह के अपराधिक वारदात की सूचना देने के लिए भी प्रेरित किया गया है। ऐसा वह किसी भी समय कर सकते हैं, जिसके लिए सार्वजनिक तौर पर नंबर भी बांटा गया है।

लेखक

Madhvi Tanwar

Police Media News

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