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आमजन का इंश्योरेंस चेक करने वाली पुलिस की खुद की सरकारी गाड़ियों का नहीं होता इंश्योरेंस

आमजन का इंश्योरेंस चेक करने वाली पुलिस की खुद की सरकारी गाड़ियों का नहीं होता इंश्योरेंस

अमूमन शहर की सड़कों पर दौड़कर...वाहनों को रोक कर पुलिसकर्मियों को दस्तावेज और इंश्योरेंस जांचते हुए आपने जरूर देखा होगा। एक दिन भी इंश्योरेंस लैप्स हुआ तो पुलिस चालान काटकर जुर्माना वसूलती भी नजर आई होगी लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि आम आदमी के वाहन का इंश्योरेंस नहीं होने पर भारी जुर्माना वसूलने वाले पुलिस महकमे की गाड़ियों का ही इंश्योरेंस नहीं है।

जानिए पूरा मामला

आमजन की गाड़ियों का इंश्योरेंस चेक करने वाले पुलिसकर्मियो की सरकारी गाड़ियों का ही इंश्योरेंस नहीं होता।  जी हां जनता को सुरक्षा का अहसास दिलाने वाले वाहन खुद असुरक्षित हैं। गौरतलब कि बगैर बीमा के वाहनों को चलाना दंडनीय है। इस पर चालान का प्रावधान है। लेकिन यूपी पुलिस की सड़कों पर घूमती सैंकड़ों गाड़ियों को शायद इस बात की परवाह नहीं । वहीं अपराधियों की नकले कसने या कोई हादसा होने पर पीडितों तक मदद पहुंचाने के लिए सड़क पर दौड़ते पुलिसिया वाहनों का इंश्योरेंस करवाने की सुध न शासन को है न पुलिस प्रशासन को।  यही वजह है कि पुलिसवाहन के सड़क पर हादसे का शिकार होने पर इंश्योरेंस क्लेम दूर की कौड़ी साबित होता है। 

पुलिस विभाग के ड्राइवरों के वेतन से होती है कटौती

वहीं हैरानी की बात ये है कि पुलिस की सरकारी गाड़ियों की वर्तमान में इंश्योरेंस की कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से अगर सरकारी गाड़ियां क्षतिग्रस्त होती है तो ऐसे हालात में पुलिस विभाग के ड्राइवरों के वेतन से भी कटौती होती है। यही वजह है कि पुलिस महकमा की गाड़ियों को चलाने वाले ड्राइवर डरे-सहमे भी  रहते हैं। यानी दूसरों को कानून का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस की गाड़ियां गैरकानूनी तौर पर सड़कों पर दौड़ रही हैं। हालांकि इसकी वजह शासन की लेटलतीफी है। हालत ये है कि सिर्फ थानेदार और सीओ जैसे अफसर ही नहीं, डीआईजी और आईजी जैसे आला अफसरों की गाड़ियों तक का इंश्योरेंस नहीं है।

नियम के मुताबिक हर वाहन का बीमा अनिवार्य है

वहीं मोटर वाहन एक्ट के तहत नियम है कि हर वाहन का बीमा होना अनिवार्य है. कानून के मुताबिक अगर कोई वाहन सड़क पर दौड़ रहा है तो उसका बीमा जरूरी है. इससे कोई लेना-देना नहीं है कि वह सरकारी वाहन है और उसका इस्तेमाल सरकार की तरफ से किया जा रहा है।

लेखक

Madhvi Tanwar

Police Media News

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