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कोरोना पैरोल पर छोड़े गए 44 कैदी में से 15 कैदी बने उन्नाव जेल प्रशासन के लिए सर दर्द, 2 के दर्ज के गलत पते

कोरोना पैरोल पर छोड़े गए 44 कैदी में से 15 कैदी बने उन्नाव जेल प्रशासन के लिए सर दर्द, 2 के दर्ज के गलत पते

उत्तर प्रदेश में कोरोना काल के समय यूपी की जेलों में बंद कैदियों में से 44 कैदियों को कोविड पैरोल पर छोड़ा गया था। जिसमें से पैरोल खत्म होने के बाद कुछ कैदी तो वापस जेल में लोट आए हैं, लेकिन 14 कैदी अभी भी उन्नाव पुलिस के लिए सर दर्द बने हुए है। ऐसे में कहीं ना कहीं लापरवाही के कारण विभाग में भी इस मामले में कहीं ना कहीं किरकिरी भी हुई है, क्योंकि इनमें 2 बंदी ऐसे भी हैं, जिनके घर का पता ही गलत दर्ज किया गया है, अब पुलिस ना तो इनकी लोकेशन का पता लगा पा रही है और ना ही अपराधियों का... ऐसे में कार्यवाहक जेल अधीक्षक ने एसपी उन्नाव को कई बार पत्र भी लिखकर फरार कैदियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की भी मांग की है। लेकिन 5 महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक यह 15  फरार कैदियों को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। बता दें कि एक बार फिर जेल अधीक्षक ने एसपी को पत्र लिखकर जेल ना लौटने वाले बंदियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने का पत्र लिखा है।

जिला पुलिस को लिखी है कई बार चिट्ठी

दरअसल कोरोना काल के समय 2 गज की दूरी को ध्यान में रखते हुए उन्नाव की जेलों में बंद 7 वर्ष या उससे कम सजा वाले 44 कैदियों को मई से अगस्त महीने के बीच 44 कैदियों को 3-3 महीने की कोविड पैरोल दी गई थी। फरवरी 2022 में इनकी समय सीमा खत्म हो चुकी है। ऐसे में कुछ कैदी तो वापस जेल लोट आए हैं, लेकिन अभी भी 15 कैदी ऐसे हैं जो जिन्हें जेल प्रशासन गिरफ्तार करने के लिए अधिकारी स्‍थानीय पुलिस को चिट्ठी लिख चुका है। लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है, वहीं पुलिस पूरे मामले में अपना बयान देने से भी बचती नजर आ रही है।

कई कैदियों को मिली जमानत तो कुछ की सजा हुई पूरी

जिला कारागार उन्नाव के कार्यवाहक जेल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह का कहना है कि कोविड काल में जिला कारागार उन्नाव से 44 आरोपी को रिलीज किया गया था। जिसमें से 8 बंदी ऐसे हैं जो रिलीज हो भी चुके हैं, मतलब उनकी या तो जमानत हो गयी है या फिर सजा पूरी हो गयी है। लेकिन अभी 15 कैदी ऐसे हैं जिनकी गिरफ्तारी बाकी है। सम्बन्धित थाना अध्यक्ष को और एसपी को भी उनकी गिरफ्तारी के लिए लेटर भेजा गया हैं। उन्होंने बताया कि छोटी धाराओ में जिसमें कम सजा थी या फिर सात वर्ष के कम सजा वाले बंदियों को रिलीज किया गया था।

लेखक

Madhvi Tanwar

Police Media News

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