जिस जेल का निरीक्षण किया, आज उसी में बंद हुए पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर

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देवरिया। कभी निरीक्षण अधिकारी की तरह जिस जेल के हर कोने पर उनकी नजर रहती थी, आज वही जेल पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की बंदीगृह बन चुकी है। औद्योगिक भूमि आवंटन विवाद में गिरफ्तारी के बाद बुधवार को अदालत से जेल भेजे गए अमिताभ ठाकुर की पहली रात इसी पुरानी परिचित जेल में बीती—लेकिन इस बार उनकी भूमिका बिलकुल अलग थी।

जेल प्रशासन ने उनकी सुरक्षा को देखते हुए उन्हें सीधे हाई-सिक्योरिटी बैरक में रखा। सूत्रों के अनुसार, रात भर वह बैरक में आते-जाते, बैठते-उठते रहे। जिस परिसर में वह कभी निरीक्षण के दौरान कमियों की सूची बनाते थे, उसी जगह अब उन्होंने जमीन पर बिछे कंबल पर रात गुज़ारी।

लगातार लिखे नोट्स

अंदरूनी कर्मचारियों का कहना है कि बैरक में पहुंचते ही अमिताभ ने अपने साथ लाए गए कई दर्जन ए4 साइज पन्नों पर कुछ लिखना शुरू कर दिया। वह लगातार नोट्स तैयार करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इन पन्नों में क्या दर्ज हो रहा है, यह कोई नहीं जानता। अधिकारी यह मानकर चल रहे हैं कि वह जेल की कार्यप्रणाली, व्यवस्थाओं और खामियों का अध्ययन उसी पुराने अंदाज़ में कर रहे हैं, जैसा वह सेवा में रहते हुए करते थे।

भोजन के समय भी उनका व्यवहार सामान्य कैदियों जैसा नहीं था। उन्हें दिया गया चावल, दाल और रोटी उन्होंने लगभग छुआ ही नहीं। सुबह उठते ही उन्होंने फिर वही कागज-क़लम उठा लिया और बैरक के एक कोने में बैठकर लिखने लगे। जेल स्टाफ इसे लेकर सतर्क है, क्योंकि बतौर एसपी वह इस परिसर के हर नियम और हर कमजोरी को पहले से जान चुके हैं।

जिला प्रशासन रहा अलर्ट पर

दिन भर उनकी चुप्पी और गहराता तनाव चर्चा का विषय रहा। जेल कर्मचारियों के बीच यह बात लगातार दोहराई जाती रही कि “जो अधिकारी कभी इस जेल का निरीक्षण करके रिपोर्ट भेजते थे, आज उसी रिपोर्ट जैसी स्थितियों के बीच खुद बंद हैं।”

इस उलट परिस्थिति ने पूरे जेल प्रशासन को अलर्ट कर दिया है, क्योंकि अब वही व्यक्ति जेल की उसी प्रणाली का हिस्सा बन गया है, जिसे कभी वह परखने आते थे।

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