उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल से पुलिस व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। यहां सड़क दुर्घटनाओं की जांच के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने नियमों को नजरअंदाज कर ऐसा तरीका अपनाया, जिससे बीमा कंपनियों को नुकसान पहुंचाया गया और बदले में अवैध वसूली की गई।
यह मामला देवीपाटन रेंज के आईजी अमित पाठक की जांच में सामने आया। इसके बाद गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती जिलों में तैनात एक इंस्पेक्टर और 12 सब इंस्पेक्टरों को निलंबित कर दिया गया। सभी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
कैसे किया जा रहा था हेरफेर
जांच में पता चला कि जिन सड़क हादसों में लोगों की मौत हुई थी, उन मामलों में कई जगहों पर गलत जानकारी दर्ज की गई। बिना बीमा वाले वाहनों की जगह बीमित वाहन दिखाए गए। वहीं जिन चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, उनकी जगह लाइसेंसधारी लोगों को कागजों में जिम्मेदार बताया गया।
इसका उद्देश्य बीमा कंपनियों से मुआवजे की रकम हासिल करना था। नियमों के अनुसार यदि वाहन बीमित न हो या चालक के पास वैध लाइसेंस न हो, तो बीमा कंपनी पर भुगतान की जिम्मेदारी नहीं बनती। इसी नियम का गलत फायदा उठाया गया।
बीमा कंपनियों की शिकायत से खुला मामला
बीमा कंपनियों ने देवीपाटन रेंज के आईजी कार्यालय में शिकायत की थी कि कई एक्सीडेंट मामलों की जांच संदिग्ध लग रही है। इसके बाद अलग-अलग जिलों में जांच कराई गई, जिसमें कुल 13 मामलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
इन मामलों में 16 जांच अधिकारी शामिल पाए गए।
जिलावार स्थिति क्या है ?
जांच में सामने आया कि बहराइच जिले से 8 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। श्रावस्ती से 3 और गोंडा से 2 पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। अन्य जिलों से भी कुछ मामलों में लापरवाही सामने आई।
अब तक 13 अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। बाकी 3 अधिकारी पहले ही स्थानांतरित हो चुके थे, इसलिए संबंधित जिलों को उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सूचना भेजी गई है।
आईजी अमित पाठक ने बताया कि जिन मामलों में गड़बड़ी मिली है, उनमें दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि सही वाहन और सही चालक की पहचान हो सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।
भ्रष्टाचार पर सख्ती
आईजी ने कहा कि पुलिस की छवि खराब करने वाले किसी भी कर्मचारी को छोड़ा नहीं जाएगा। जांच आगे भी जारी रहेगी और यदि और लोग दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।