इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR में फिल्मी संवादों पर पुलिस को लगाई फटकार

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने बहराइच जिले में दर्ज एक एफआईआर में फिल्मी संवादों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। अदालत का कहना था कि एफआईआर में दर्ज संवाद वास्तविकता से मेल नहीं खाते और यह पूरी तरह से काल्पनिक और फिल्मी स्क्रिप्ट की तरह प्रतीत होते हैं। खासकर एफआईआर में पुलिस द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए संवादों जैसे “तुम लोग पुलिस से घिरे हो, आत्मसमर्पण कर दो” और “उजाला होने वाला है” को लेकर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई।

इससे जुड़ा है मामला

यह मामला एक कथित पुलिस मुठभेड़ से जुड़ा था, जिसमें गोहत्या में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। एफआईआर के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान आरोपी ने यह कहा था, “उजाला होने वाला है”, जबकि घटना का समय सुबह 10:45 बजे बताया गया था, जो कि भोर का समय नहीं था। इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए इसे जमीनी हकीकत से पूरी तरह परे बताया और कहा कि यह घटनाएं फिल्मी पटकथा से मेल खाती हैं।

हाई कोर्ट ने आगे कहा कि इस तरह की मनगढ़ंत घटनाओं और संवादों से पुलिस अधिकारियों के द्वारा कानून के दुरुपयोग का इशारा मिलता है। अदालत ने बहराइच के पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि वह इस पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें और दो सप्ताह के भीतर जवाब दें। अदालत ने यह भी कहा कि एफआईआर में जो विसंगतियां दिख रही हैं, उनका स्पष्ट जवाब देना आवश्यक है।

कोर्ट ने कहा ये

इस पूरे मामले में कोर्ट ने पुलिस की सख्त आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की एफआईआर को रद्द किया जा सकता है, क्योंकि यह पूरी तरह से फिल्मी और मनगढ़ंत प्रतीत होती है। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि अदालतें अब इस तरह के गैर जिम्मेदाराना एफआईआर पर गंभीर ध्यान दे रही हैं, ताकि कानून का सही इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सके

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